बचाव पक्ष की दलील थी कि उक्त भवन के स्वामी श्याम लोहिया द्वारा अपना मकान किराये पर कार्यालय खोलने के लिए दिया गया था। जिसकी किरायेदारी की अवधि मार्च में समाप्त हो रही है और वे उक्त संपत्ति को बेचना चाहते हैं।
उनके कहने पर ही लक्ष्मीकांत ओझा ने कार्यालय वाले भवन को बेचने के उसकी फोटो ओएलएक्स पर अपलोड की थी। आरोपियों द्वारा इसके लिए कोई कूटरचना या धोखाधड़ी नहीं की गई है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने और पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।