Varanasi News: मशीन की खासियत है कि बच्चे के सांस छोड़ने पर उसमें नाइट्रिक ऑक्साइड की मात्रा का पता चल सकेगा, जिससे दमा जैसी बीमारी की पहचान आसान हो जाएगी।
बीएचयू के बाल रोग विभाग में अब दमा की जानकारी सटीक मिल सकेगी। यहां नई मशीन से एफईएनओ (फ्रैक्शनल एक्सहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड) जांच होगी।
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रविवार को बीएचयू केएन उडुप्पा सभागार में आयोजित कार्यशाला में बच्चों में दमा पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर और पल्मोनलाय डिवीजन की ओर से आयोजित कार्यशाला में केजीएमयू से प्रोफेसर सारिका गुप्ता और प्रो. शेतान्शु श्रीवास्तव ने बच्चों में दमा की पहचान और इलाज के बारे में बताया।
प्रो.सुनील कुमार राव ने बताया कि बदलते हुए मौसम, प्रदूषण और खानपान में बदलाव से बच्चों में एलर्जी की समस्या बढ़ी है। बताया कि एफईएनओ जांच शुरू होने से बीएचयू में आने वाले दमा ग्रसित बच्चों की बीमारी की पहचान कर इलाज भी बेहतर तरीके से होगा। आईएमएस निदेशक प्रो.एसएन संखवार ने इस तरह की कार्यशाला को डॉक्टरों के साथ मरीजों के लिए भी उपयोगी बताया। प्रो.अंकुर सिंह, डॉ.अनिल कुमार सरोज, प्रो.विनीता गुप्ता मौजूद रहे।