उन्नाव जिले के डौंडिया खेड़ा में सोने की तलाश को लेकर खुदाई और कुछ नहीं मिलने पर देश भर में किरकिरी के बाद भी साधु संत में जागरूकता नहीं आई।
बाबा शोभन सरकार के बाद संभल के पौराणिक चंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी बाबा बिहारी गिरि के शिष्य ने भी प्राचीन शिवलिंग के नीचे खजाना होने का सपना देखा। जिसे सच मानते हुए महंत ने अपने शिष्यों के साथ मंदिर के ही कक्ष से खुदाई शुरू कर दी। सप्ताहभर के अंदर 70 फिट गहरी सुरंग बना ली।
इसी समय ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने महंत समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
चंदायन गांव स्थित चंद्रेश्वर महादेव मंदिर संभल के 68 तीर्थों में चार प्रमुख मंदिरों में एक है। इस मंदिर के नाम करीब चार सौ बीघा से अधिक जमीन थी लेकिन सभी भूमि खुर्दबुर्द हो चुकी है, दो बार यहां के पुजारियों की हत्या भी हो चुकी है।
बीते दस सालों से यहां केली गांव निवासी बिहारी गिरि महंत हैं। बताते हैंकि पंद्रह दिन पहले उनके शिष्य बदायूं के थाना बिसौली के बरखेड़ा गांव निवासी बलराम ने उन्हें बताया कि उसके सपने में लगातार मंदिर का प्राचीन शिवलिंग आ रहा है, उसके नीचे बड़ा खजाना भी दिख रहा है।
महंत ने इस पर भरोसा करते हुए सरायरीन के भालेभाज खां मुहल्ला निवासी डा. हरपाल, हिंडौली गांव के मुन्ना, दहेली गांव के रामौतार, बिसौली के बिजेंद्र आदि के साथ टीम बनाई। मंदिर से सटे कक्ष के अंदर से खुदाई शुरू कर दी। रात को कक्ष बंद करके रोजाना खुदाई शुरू हो गई। करीब साठ सत्तर फीट का गड्ढा बन गया।
रातभर को मंदिर पर खटपट व बोलने की आवाजों से ग्रामीणों को कई बार लगा कि शायद मंदिर पर बदमाश आ गए हैं। जाकर भी देखा तो महंत ने कह दिया कि उनके मिलने वाले लोग है। लेकिन जब लगातार मंदिर पर गतिविधियां दिखी तो ग्रामीणों ने पुलिस से शिकायत कर दी।
हयातनगर पुलिस ने शनिवार को मंदिर पर जाकर देखा तो वहां सुरंग देखकर चौंक गए। खुदाई करने के उपकरण व यहां महंत समेत वहां मौजूद सभी छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस को पौराणिकता की जानकारी नहीं
हयातनगर थाने के एसएसआई शंभूशरण का कहना है कि चंद्रेश्वर महादेव मंदिर पुरातत्व विभाग से संरक्षित नहीं है, खजाना भी नहीं निकला है, खुदाई का कार्य रुकवा दिया गया। महंत समेत सभी छह लोगों का शांति भंग की आशंका में चालान किया गया है।
संरक्षित मंदिर से छेड़छाड़ ठीक नहीं
अजय कुमार शर्मा, प्रवक्ता संभल तीर्थ परिक्रमा समिति के मुताबिक संभल चंद्रेश्वर महादेव मंदिर उन प्राचीन पौराणिक मंदिरों में से एक है, जिनकी स्थापना देवताओं ने की थी। यह चंदन के वन क्षेत्र में स्थित होने के कारण ही यहां का नाम चंदायन पड़ा। यहां पृथ्वीराज चौहान भी प्राकृतिक चिकित्सा के लिए आया करते थे। मंदिर पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है, जिसका बोर्ड मंदिर पर लगा हुआ है। इसलिए यहां कोई भी व्यक्ति खुदाई व उसकी प्राचीनता के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता। पुलिस को मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।
चुपचाप होती रही खुदाई, किसी को भनक नहीं लगी
संभल। बिना किसी मशीन के फावड़े व परातों के जरिये ही महंत की टीम ने साठ सत्तर गड्ढा खोद दिया। गहरी में लोहे का खूंटा गाड़कर उसमें रस्सी बांधकर उसके सहारे मिट्टी को बाहर लाया जाता था। खुदाई का कार्य का कार्य रातभर चलता था। महंत की टीम किसी को खजाने की जानकारी देना नहीं चाहती थी, खुदाई की जानकारी निकटस्थ चंदायन गांव के ग्रामीणों को भी नहीं थी।