जिले के कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य के लिए हुए टेंडर में अनियमितता का मामला संज्ञान में आने पर पंचायती राज विभाग सक्रिय हो गया है। डीपीआरओ विशाल सिंह ने सभी एडीओ पंचायत को ग्राम पंचायतों में कराए गए टेंडर नियम के अनुसार हुए हैं या विरुद्ध, इसकी जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इससे स्वयं और रिश्तेदारों को टेंडर दिलाने वाले ग्राम प्रधानों व सचिवों में हड़कंप मच गया है।
जिले की 629 ग्राम पंचायतों में केंद्र और प्रदेश सरकार शहरों की तर्ज पर सड़क, नाली समेत अन्य विकास कार्य कराने के लिए खूब धनराशि दे रही है। डीएम अभिषेक सिंह ने सभी बीडीओ को ग्राम पंचायतों में मैटेरियल आपूर्ति करने के लिए पारदर्शिता पूर्वक टेंडर कराने का निर्देेश दिया है। डीएम ने सख्त निर्देश दिया है कि कोई ग्राम प्रधान या सेक्रेट्री खुद या उनके रिश्तेदार टेंडर नहीं ले सकते। सूत्रों की मानें तो डीएम के कड़े निर्देश के बाद भी घोरावल विकास खंड के ग्राम पंचायत खैरा समेत कई ग्राम पंचायतों में नियमों को दरकिनार कर टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई है। एक प्रधान ने तो मटका, पुरना, देवगढ़ समेत कई गांवों का टेंडर लिया है। इसी तरह से कई ग्राम पंचायतों में अनियमितता बरती गई है। मामला संज्ञान में आने पर डीपीआरओ ने सभी ब्लॉकों के एडीओ पंचायतों को अपने-अपने क्षेत्रों के ग्राम पंचायतों में नियमों के तहत टेंडर हुआ है या नहीं इसकी जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। नियमों की अनदेखी करने वाले ग्राम पंचायतों का टेंडर निरस्त होगा।
कुछ ग्राम पंचायतों में विकास कार्य के लिए हुए टेंडर में अनियमितता बरतने का मामला संज्ञान में आने पर सभी सहायक विकास अधिकारियों से टेंडर से जुड़ी जानकारी तलब की गई है। जांच में जिन ग्राम पंचायतों में नियमों को दरकिनार कर टेंछर करने की पुष्टि होगी, वहां का टेंडर निरस्त किया जाएगा। - विशाल सिंह, डीपीआरओ।