अस्पताल पर तैनात चिकित्सक डॉ. अभय ने जांच के बाद सोनी को मृत घोषित कर दिया। वहीं अनीता और विवेक को एंटी स्नेक वैनम लगाते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने पर अनीता की भी मौत हो गई। विवेक की हालत गंभीर है। चोपन एसओ लक्ष्मण पर्वत ने बताया कि सर्पदंश से मां-बेटी की मौत हुई है। दोनों के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
कवने पाप क सजा देहला ऐ भगवान... काहे हमार दुनिया उजाड़ देहला... पत्नी और बेटी की मौत के बाद विलाप करते ईश्वर चंद्र के मुंह से बार-बार यही निकल रहा था। एक तरफ पत्नी और बेटी की लाश पड़ी थी तो दूसरी ओर बेटा अस्पताल में था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह अब क्या करे। घटना की खबर सुनकर पहुंचे नाते-रिश्तेदार उसे संभालने में जुटे थे लेकिन खुद हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे।
मूल रूप से घोरावल क्षेत्र के निवासी ईश्वर चंद्र दशकों से चोपन में ही रह रहे हैं। भूसा बेचकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करने वाले ईश्वर चंद्र ने सिर छिपाने के लिए पानी टंकी के पास ईंट की दीवार खड़ी कर उस पर टीनशेड की छत लगाई थी। इसी मकान में पूरा परिवार रहता था।
सपना था कि पैसे इकट्ठे हो जाएंगे तो फिर पक्की छत डाली जाएगी। इससे पहले ही नियति ने परिवार को बड़ी आपदा से घेर दिया। हृदय विदारक घटना की खबर सुनकर लोगों की भीड़ जुट गई। चेयरमैन प्रतिनिधि उस्मान अली ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया।
एसडीएम ओबरा राजेश सिंह, एसओ लक्ष्मण पर्वत भी मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने पीड़ित परिवार को आपदा राहत के तहत 4-4 लाख रुपये की मदद दिलाने का भरोसा दिया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के चार सदस्यीय दल ने बेटे विवेक का फौरी तौर पर उपचार शुरू किया, जिसके बाद उसकी तबीयत में सुधार हुआ।