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एक साल पहले खत्म हो गया रजिस्ट्रेशन, फिर भी चल रहा अस्पताल

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जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी होने लगी है। सीएमओ कार्यालय में तैनात कुछ बाबुओं की मिलीभगत से निजी अस्पताल, अल्ट्रासाउंड व पैथोलॉजी सेंटर बिना पंजीकरण के ही चल रहे हैं। पिछले दिनों डीएम के निर्देश पर सदर एसडीएम डॉ. केएस पांडेय और एसीएमओ की संयुक्त टीम की जांच में ऐसे ही एक अस्पताल की जानकारी सामने आई है। उस अस्पताल का पंजीकरण एक साल पहले ही खत्म हो चुका है, बावजूद अस्पताल चल रहा है। एसडीएम ने जांच रिपोर्ट डीएम समेत अन्य अधिकारियों को भेज दी है।
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जांच टीम के प्रभारी डॉ. केएस पांडेय की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग में चल रहे खेल की पोल खोल रही है। रिपोर्ट में लिखा है कि महावीर चैरिटेबल हॉस्पिटल व सर्जिकल सेंटर का निरीक्षण किया गया तो वहां एक बीएएमएस डिग्रीधारी चिकित्सक मौजूद मिले। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन वर्ष 2009 का है जिसकी वैधता 30 अप्रैल 2020 को ही खत्म हो चुकी है। अभी तक नवीनीकरण नहीं हुआ है। टीम में शामिल एसीएमओ डॉ. राजीव यादव ने जांच में पाया कि रजिस्ट्रेशन में दर्शाए गए डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति ऑपरेशन करने के लिए वाराणसी से आते हैं। अस्पताल में कोई भी एनेस्थीसिया का चिकित्सक और पैथोलॉजिस्ट नहीं है। अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था भी नहीं थी। अस्पताल में पांच मरीज भर्ती थे और वहां कोई स्टाफ नर्स नहीं थी। एसीएमओ ने इस अस्पताल को बंद करने की संस्तुति की है। एसीएमओ डॉ. राजीव यादव ने बताया कि डीएम के निर्देश पर जांच की गई थी। इसकी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
डॉक्टर को पता नहीं रजिस्ट्रेशन के लिए हो गया आवेदन
सोनभद्र। महावीर डायग्नोस्टिक सेंटर एंड पैथोलॉजी के नाम से ही म्योरपुर में एक अस्पताल के रजिस्ट्रेशन के आवेदन के सत्यापन में भी चौंकाने वाली बात सामने आई। सीएचसी म्योरपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. शिशिर श्रीवास्तव ने स्थलीय निरीक्षण आख्या में लिखा है कि रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन के पते में दर्शाए गए स्थान पर भवन का निर्माण चल रहा है। भवन के मालिक ने जिस डॉक्टर को सेंटर के लिए मकान देने की बात कही उनके मोबाइल नंबर पर बात करने पर बताया गया कि उसने महावीर डायग्नोस्टिक सेंटर एंड पैथोलॉजी सेंटर के रजिस्ट्रेशन के लिए कोई आवेदन ही नहीं किया है। इससे जांच टीम हैरान है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि विभाग के कुछ बाबू ऐसे अस्पतालों को संरक्षण दे रहे हैं।
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