सोनभद्र में दस वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म के आठ साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने दोषी किशन औतार को 20 साल कैद की सजा सुनाई है। उस पर 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर एक साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अर्थदंड की धनराशि नियमानुसार पीड़िता को मिलेगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक बीजपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने थाने में 24 जून 2013 को तहरीर देकर बेटी संग दुष्कर्म का आरोप लगाया था। तहरीर में उसने कहा कि बेटी मवेशी ढूंढने के लिए घर से निकली थी। रास्ते में खम्हरिया गांव निवासी किशन औतार ने झांसा देकर बालिका को जंगल की ओर भेज दिया। फिर वहां पहुंचकर उसके साथ दुष्कर्म किया। बालिका जंगल में बेहोशी की हालत में मिली थी। होश आने पर बेटी ने घटना की जानकारी दी।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की। पर्याप्त साक्ष्यों के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों, गवाहों के बयान और पत्रावलियों का अवलोकन करते हुए आरोपी किशन औतार को दुष्कर्म का दोषी करार दिया। उसे 20 साल की कैद और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर एक साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
साथ ही अर्थदंड की धनराशि नियमानुसार पीड़िता को मिलेगी। सजा में जेल में बितायी अवधि समाहित रहेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील दिनेश अग्रहरि एवं सत्यप्रकाश तिवारी ने बहस की।
सोनभद्र में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने मिथ्या साक्ष्य देने पर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला अंतर्गत वंडरफनगर 100 बेड अस्पताल की चिकित्सा अधिकारी डॉ. कामिनी रॉय के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। इसी मुकदमे में चिकित्साधिकारी ने जो मेडिकल रिपोर्ट दी थी, वह जांच में गलत पाई गई।