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प्रसव के दो घंटे बाद ही कर दिया डिस्चार्ज, सीएमओ ने जताई नाराजगी

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सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की देखरेख में मनमानी हावी है। शुक्रवार को मधुपुर पीएचसी पर सीएमओ के निरीक्षण में इसकी पोल खुली। सुबह प्रसव कराने वाली महिला को कुछ घंटे बाद दोपहर में ही डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन रजिस्टर में देर शाम साढ़े छह बजे का समय अंकित कर दिया। मौके पर जच्चा-बच्चा को न देख हैरानी जताते हुए सीएमओ ने जब पूछताछ की तो सच्चाई सामने आई। यहां डॉक्टर दवाओं के शॉर्ट नेम और कांबिनेशन भी नहीं बता सके।
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सीएमओ डॉ. नेम सिंह शुक्रवार की दोपहर अचानक मधुपुर पीएचसी निरीक्षण के लिए पहुंच गए। कोरोना के बाद से यहां ओपीडी का संचालन ठप है। सिर्फ टीकाकरण का कार्य चल रहा है। निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. ममता सिंह, आयुष चिकित्सक सुषमा और दंत रोग विशेषज्ञ एक ही कमरे में बैठे थे। किसी के नाम का कोई नेम प्लेट नहीं लगा था। सीएमओ ने नेम प्लेट के साथ संबंधित चिकित्सा विवरण का बोर्ड लगाकर अलग-अलग बैठने को कहा। सीएमओ ने दवाओं के शार्ट नेम और कांबिनेशन के बारे में पूछा तो डॉक्टर नहीं बता सके। यहां रजिस्टर में बंतरा गांव निवासी एक गर्भवती को बृहस्पतिवार की शाम आठ बजे भर्ती दिखाया गया। शुक्रवार की सुबह 8:20 पर प्रसव हुआ और दस बजे ही उसे घर भेज दिया गया। हालांकि रजिस्टर में डिस्चार्ज करने का समय शाम साढ़े छह बजे लिखा गया था। सीएमओ ने इस पर नाराजगी जताते हुए डॉक्टरों को निर्देश दिया कि जच्चा-बच्चा को प्रसव के कम से कम 24 घंटे बाद ही डिस्चार्ज करें। सीएमओ ने कहा कि इन खामियों पर नोटिस देकर स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
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