मंगलवार को प्रदेश में बिजली की मांग के हिसाब से परियोजनाओं का उत्पादन घटाया-बढ़ाया गया। दोपहर में मांग कम होते ही जहां इकाइयों से थर्मल बैकिंग प्रारंभ कर दी गई। वहीं मांग में इजाफा होते ही शाम होते-होते इकाईयों को फुल लोड पर संचालित किया जाने लगा।
बदलते मौसम का असर बिजली की मांग पर भी देखा जा रहा है। दोपहर में प्रदेश के कई इलाकों में हुई बूंदाबांदी के कारण बिजली की मांग 15 हजार मेगावाट से भी नीचे आ गई। इससे सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर निगम व निजी बिजली घरों से थर्मल बैकिंग प्रारंभ कर दी गई। इस दौरान अनपरा व लैंको परियोजना से 700 मेगावाट के करीब उत्पादन कम कराया गया। शाम होते-होते मांग बढ़ने के सापेक्ष ही इकाइयों का लोड बढ़ाने का निर्देश जारी किया गया। धीरे-धीरे सभी इकाइयों से पूर्ण क्षमता से उत्पादन किया जाने लगा। शाम पांच बजे तक अनपरा ए से 327, बी से 443, डी से 943 तथा लैंको से 1097 मेगावाट उत्पादन किया जा रहा था। ब्वायलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद हुई अनपरा की पहली इकाई से देर रात तक उत्पादन प्रारंभ हो जाने की संभावना जताई जा रही है।
बिजली की मांग 23 हजार मेगावाट पार
बरसात का क्रम थमने के बाद प्रदेश में तापमान बढ़ने लगा है। इससे चार दिनों से एक बार फिर बिजली की मांग में उतरोत्तर वृद्धि का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। सोमवार रात में बेतहाशा गर्मी व उमस के कारण बिजली की अधिकतम मांग बढ़कर 23291 मेगावाट पहुंच गया।