ग्राम पंचायतों में बेंच लगाने के नाम पर डेढ़ करोड़ से अधिक धनराशि हजम करने वाले ग्राम प्रधानों और सचिवों ने नोटिस मिलने के बाद भी फूटी कौड़ी जमा नहीं की है। अधिकांश ग्राम प्रधानों और सचिवों ने तो नोटिस का जवाब तक देना मुनासिब नहीं समझा। पंचायती राज विभाग ने भी अब सरकारी धन की रिकवरी कराने को लेकर चुप्पी साध लिया है।
जिले के करीब 140 ग्राम पंचायतों में सीमेंटेड बेंचों को लगाने के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है। कई सेक्रेटरियों और ग्राम प्रधानों ने छह हजार रुपये के बेंच को 12 हजार रुपये तक में खरीद कर संबंधित फर्मों का भुगतान कर दिया है। इसकी शिकायत मिलने पर तत्कालीन डीएम टीके शिबू ने कई अधिकारियों को मौकेे पर भेज कर जांच कराया तो बेंचों के लगवाने के नाम पर सरकारी धन के किए गए बंदरबाट की कलई खुल गई। सूत्रों की मानें तो महंगे दर पर बेंचों को क्रय कर करीब एक करोड़ 65 लाख रुपये डकार लिए जाने का खुलासा हुआ।
नवागत डीएम चंद्र विजय सिंह के निर्देश पर सरकारी धन का बंदरबांट करने वाले करीब 52 सचिवों और 140 ग्राम प्रधानों को नोटिस जारी कर उनसे रिकवरी करने को कहा गया लेकिन अब यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। नोटिस मिलने के बाद भी किसी ने एक रुपये भी राजकीय कोष में जमा नहीं किया है। वहीं पंचायती राज विभाग भी संबंधितों से रिकवरी कराने को लेकर संजीदा नहीं है। उधर कई सचिवों ने नाम छापने की बात कहते हुए कहा कि कुछ अधिकारियों ने मनमाने ढंग से जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी है। रिकवरी की नोटिस जारी करने से पूर्व संबंधित ग्राम प्रधानों और सचिवों को अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया है। सीधेेेे रिकवरी का नोटिस थमा दिया गया। अधिकारियों से हमें न्याय नहीं मिला तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इस संबंध में डीपीआरओ से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
कागजों पर लगा दिया गया बेंच
बभनी, म्योरपुर, दुद्धी, कोन, चोपन, राबर्ट्सगंज, करमा, नगवां और चतरा ब्लॉक के करीब 150 ग्राम पंचायतों में करीब 3300 बेंच लगाए गए हैं। करीब 140 ग्राम पंचायतों में महंगे दर पर बेंचों की खरीददारी की गई है। कई ग्राम पंचायतों में तो छह हजार के बेंच को 12 हजार रुपये तक में खरीदा गया है। इतना ही नहीं कई ग्राम पंचायतों में कम बेंच लगे है और कागजों में ज्यादा बेंचों को लगा दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट कर लिया गया है। घोटाले का खुलासा होने के बाद कई ग्राम प्रधान और सचिवों ने कागजात में भी हेराफेरी कर बचने का प्रयास किया है।