कुपोषण के खात्मे के लिए चलाए जा रहे पोषण माह के तहत सोनभद्र जिले में 1867 बच्चे अति कुपोषित और 4554 कुपोषित हैं। अभियान के तहत अब तक दो लाख से अधिक बच्चों के वजन में यह आंकड़ा सामने आया है। अब इन बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए विभाग युद्धस्तर पर जुट गया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत कुमार सिंह ने बताया कि कुपोषण एक जन स्वास्थ्य समस्या है। इसके उपचार के लिए स्वास्थ्य एवं पोषण की विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। अति कुपोषित (सैम) बच्चों में मौत की संभावना सामान्य बच्चों की तुलना में ज्यादा होती है। ऐसे में सभी कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की गहन देखभाल की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा जनपद में चलाए गए वजन सप्ताह अभियान के अंतर्गत कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर लिया गया है। अति कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए जिला संयुक्त चिकित्सालय लोढ़ी में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों को भर्ती कराने के लिए उनके अभिभावकों को प्रोत्साहित भी किया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने वजन सप्ताह अभियान के दौरान कुल 203588 बच्चों का वजन किया गया। इसमें 4554 बच्चे कुपोषित और 1867 अति कुपोषित चिह्नित किए गए हैं।
दो अक्तूबर तक चलेगा संभव अभियान
जिले में एक जुलाई से संभव अभियान चलाया जा रहा है, जो दो अक्तूबर तक चलेगा। यह अभियान कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के लिए आयोजित किया जा रहा है। संभव अभियान का मुख्य उद्देश्य गंभीर अल्प वजन वाले बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार लाना है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत कुमार सिंह ने कहा कि सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। यह अभियान बच्चों, किशोरियों एवं महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत विविध कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है।