सीतापुर। पुलिस... ये महज शब्द नहीं बल्कि मानवता और इंसानियत की मिसाल भी है। लोगों की पुलिस को लेकर धारणाएं बदलती रहती हैं। जरा सी बात पर सवाल खड़े हो जाते हैं, लेकिन सराहनीय कार्य पर लोगों की दिल खोलकर दुआएं भी मिलती हैं। ऐसी ही दुआएं सीतापुर शहर कोतवाली पुलिस को भी मिली है।
कोतवाली में तैनात सिपाही ने दिल्ली की एक अनजान बेसहारा बेटी को सहारा देकर पुलिस का मान यूपी से लेकर दिल्ली तक बढ़ाया है। बेटी को पाकर खुश हुए माता-पिता भी सिपाही की प्रशंसा करने से थक नहीं रहे हैं। बेटी को पाकर गदगद माता-पिता के खुशी से आंसू छलक पड़े।
शहर कोतवाल टीपी सिंह ने बताया कि नई दिल्ली के तिलकनगर क्षेत्र की निवासी किशोरी सोमवार सुबह घर से नाराज होकर चली गई। वह दिल्ली से बस से हरिद्वार गई, जहां पर आश्रम में रात भर रही। इसके बाद अगले दिन हरिद्वार से बस में बैठकर मुरादाबाद तक पहुंची। मुरादाबाद से बस पकड़कर बिहार के सीतामढ़ी में रह रहे चाचा-चाची के पास जाने को लखनऊ की बस में सवार हुई थी।
लखनऊ जाने के लिए मुरादाबाद से बस में सवार किशोरी की सीट के पास ही शहर कोतवाली सीतापुर में तैनात सिपाही गौरव बैठ गया। मुसाफिरों को लेकर बस आगे बढ़ी। सिपाही ने वर्दी नहीं पहन रखी थी। किशोरी ने मदद के नाम पर कुछ रुपये मांगे। सिपाही गौरव कुमार का कहना है कि किशोरी के पैसे मांगने पर उसे कुछ गड़बड़ लगा।
उसने पूछा कि वह कौन है, कहां की रहने वाली है, कहां जा रही है, इस पर किशोरी ने पूरी कहानी बताई। सिपाही ने उसे घर जाने की सलाह दी, लेकिन मां-बाप के डांटने की वजह से किशोरी ने घर जाने से इंकार कर दिया, फिर सिपाही ने नंबर लेकर उसके मां-बाप से बात कर जानकारी ली।
उधर से कहा गया कि उनकी बेटी किसी कोतवाली, थाने पर बिठा दें। वह लोग लेने आ जाएंगे, लेकिन तब तक बस शाहजहांपुर पहुंच चुकी थी। सिपाही ने कहा कि वह रास्ते में कहीं नहीं बिठाएगा। दिक्कत हो सकती है। सीतापुर शहर कोतवाली लेकर जा रहा हूं, वहां आप लोग आ जाइए। इसके बाद गौरव किशोरी को लेकर शाम को कोतवाली पहुंचा।
भोर में पहुंचे दंपती, बेटी को लेकर दिल्ली रवाना
कोतवाली पहुंचने के बाद सिपाही ने किशोरी को हेल्प डेस्क पर सिपाही प्रिया ठाकुर को सौंप दिया। शाम को कोतवाल टीपी सिंह दफ्तर पहुंचे, जहां पर सिपाही प्रिया किशोरी को लेकर उनके सामने पेश हुई और पूरी कहानी बताई। इसके बाद कोतवाल ने किशोरी के मां-बाप से बात की। उन लोगों ने कहा कि वह आगरा पहुंच चुके हैं।
भोर में दंपती सीतापुर शहर कोतवाली आ गए, जहां पर कोतवाल टीपी सिंह ने कागजी कार्रवाई करते हुए बेटी को मां-बाप के सुपुर्द कर दिया। दंपती बेटी को लेकर दिल्ली चले गए।
नहीं खली घर की कमी, बेटी की तरह रखा ख्याल
कोतवाली में किशोरी के पहुंचने के बाद उसे घर की कमी नहीं खली। भले ही घर सीतापुर से 400 किमी. दूर था। मां-बाप भी नहीं थे, लेकिन मामला कोतवाल टीपी सिंह के पास पहुंचने के बाद न तो उसे घर की कमी का अहसास हुआ, न ही कोई दिक्कत हुई। किशोरी भूखी थी। कोतवाल ने उसे खाना खिलवाया।
कोतवाल ने पिता की तरह पूरी बात पूछी। रात में कोतवाली में ही महिला पुलिस की सुपुर्दगी में बेटी को रोका गया। किशोरी ने बताया कि उसने पुलिस के बारे में तमाम भला-बुरा सुना था, लेकिन वाकई में सीतापुर की पुलिस फरिश्ते से कम नहीं है। सिपाही प्रिया ठाकुर ने बहन की तरह फर्ज निभाया।
सभी हुए भावुक, भर आईं आंखें
रात भर बेटी की तरह कोतवाली में किशोरी को रोकने के बाद सुबह वह अपने मां-बाप के साथ जाने लगी तो उससे और उसके परिजनों से हुई बातचीत को यादकर कोतवाल टीपी सिंह भावुक हो गए। कुछ देर के लिए उनकी आंखें डबडबा गईं। कोतवाल के अलावा किशोरी और उसके मां-बाप भी भावुक हो गए। उनकी आंखों से भी आंसू छलक पड़े।
इससे पहले भी कोतवाल टीपी सिंह ने जौनपुर की एक बेटी को रात में कोतवाली में रोककर अनजान शहर में उसकी मदद की थी। कोरोना काल में शहर में फंसे बिहार के कई लोगों की रात में मदद कर खाना खिलाया था। टिकट कराकर ट्रेन पकड़वाई थी।