सीतापुर। वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। जिला अस्पताल में फीवर के चलते एक बच्चे की मौत हो गई। यह बच्चा दो दिन से जिला अस्पताल में भर्ती था। वहीं चिल्ड्रेन वार्ड में अव्यवस्था फैली हुई है। बेड के पास ही निर्माण कार्य चल रहे है। इससे उठने वाली धूल बच्चों व तीमारदारों को परेशान कर रही है।
रेउसा इलाके के रजुवापुरवा निवासी ठाकुर प्रसाद का चार माह का पुत्र शिवपाल जिला अस्पताल में दो दिन पहले भर्ती हुआ था। परिवारीजनों ने बताया कि शिवपाल को बुखार, दस्त व खांसी की समस्या बनी हुई थी। पहले रेउसा में दिखाया, जब वहां फायदा नहीं हुआ तो यहां लेकर आए थे। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान शुक्रवार को बच्चे की मौत हो गई।
वहीं चिल्ड्रेन वार्ड में इस समय निर्माण कार्य चल रहा है। अस्पताल प्रशासन ने बरामदे में ही बेड डाल दिए हैं। इन बेडों के पड़ोस में ही टाइल्स लगाए जा रहे हैं। इससे टाइल्स काटने की आवाज आती रहती है। इसके कारण मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार का कहना है अस्पताल में अभी डेंगू व वायरल फीवर से किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है। मौत अन्य कारणों से हुई है।
सीएमओ डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि डेंगू के रोगी में तेज बुखार, बदन दर्द, सरदर्द, जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते या लाल दाने जैसे लक्षण होते हैं।
आंख, मुंह, नाक, मल व मूत्र के स्थान से खून आना, आंखें घुमाने पर तेज दर्द होना, जी मितलाना, उल्टी-दस्त व पेट में दर्द होना, रक्त की जांच कराने पर प्लेटलेट्स की संख्या का एक लाख से कम हो जाना आदि इस रोग के मुख्य लक्षण हैं। डायबिटीज रीनल फेल्योर श्वसन रोगी, किडनी रोगी व प्रतिरोधक क्षमता कम वाले व्यक्ति में यह रोग गंभीर हो सकता है। रोगी की मौत भी हो सकती है।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार का कहना है इस समय वायरल फीवर व डेंगू के मामले आ रहे हैं। डेंगू के नए वैरिएंट आने की भी बात सामने आ रही है। इसलिए बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बच्चों को संतुलित आहार दें। उनको मच्छर कटाने से बचाएं। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं। जब भी घर से बाहर निकलें, सोशल डिस्टेसिंग व मास्क का प्रयोग जरूर करें।
घरों में संचयित पानी को साप्ताहिक अंतराल पर बदलते रहें। कूलर का पानी बदलने के बाद टंकी को रगड़कर साफ करें ताकि उस पर चिपके मच्छरों के अंडे और लार्वा मर जाएं। संभव हो तो टंकी चार से पांच दिनों तक धूप में सुखाएं।
घर के आसपास गंदगी न फैलने दें और न ही पानी एकत्रित होने दें। शरीर को अधिकतम ढकने वाले वस्त्र पहनें। मच्छर भगाने वाली औषधि एवं सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। नीम की पत्ती का धुआं करें एवं पानी को एकत्रित न होने दें।