सीतापुर। दीपावली गुरुवार को मनाई जाएगी। उसके बाद भाईदूज का पर्व है। इन त्योहारों में मिठाई का कुछ अलग ही आनंद रहता है। मेहमानों के लिए घरों में तमाम तरह के लजीज व्यंजन बनाए जाएंगे। ऐसे में मिलावटखोर अधिक मुनाफे के चक्कर में खाद्य पदार्थों में मिलावट कर सकते हैं। इसलिए बहुत ही सतर्क रहकर खरीदारी करने की जरूरत है। अगर थोड़ी सी लापरवाही बरती तो खाद्य पदार्थ सेहत बिगाड़ सकते है।
मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि त्यौहारों को लेकर विभाग द्वारा बराबर अभियान चलाया जा रहा है। दीपावली पर 50 से अधिक नमूने लिए जा चुके हैं। व्यापारियों को जागरूक किया जा रहा है। इसलिए संभलकर खाद्य पदार्थों को खरीदें।
अभिहित अधिकारी अरविंद कुमार यादव का कहना है कि ब्रांडेड सामान की खरीदारी को ज्यादा प्राथमिकता दें। अगर इनमें मिलावट होती है तो उसकी जिम्मेदारी कंपनी की होती है। जिस पर कार्रवाई भी आसानी से हो जाती है। अन्य सामान खरीदते समय यह देख लें कि उसकी उत्पादन व एक्सपायर तिथि क्या है। कलर वाली मिठाइयों को न खरीदें। चॉदी वर्क वाली अगर सस्ती मिठाइयां हैं तो उससे परहेज करें।
खराब हो सकती लिवर व किडनी
जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. जेएन सिंह का कहना है कि मिलावटी मावे से बनी मिठाइयों के सेवन से शरीर का पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इससे उल्टी, दस्त, पेट दर्द एवं गैस की समस्या पैदा होती है। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी पदार्थ का उपयोग करने से लिवर और किडनी जैसे उपयोगी अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ता है। सही उपचार न होने पर लिवर और किडनी खराब भी हो सकती हैं।
दूध की खुद कर सकते हैं जांच
आमतौर पर त्यौहार के दिनों में लोग दूध खरीदते है। दूध से ही विभिन्न खाद्य पदार्थ बनाए जाते है। इसलिए दूध में होने वाली मिलावट को इस तरह पहचान सकते है। एफएसओ अजय कुमार का कहना है कि एक बर्तन या परखनली में थोड़ा दूध लें और उसमें एक चम्मच सोयाबीन या अरहर का पाउडर मिलाएं। पांच मिनट तक इसे हिलाएं और इसके बाद लाल लिटमस पेपर पर घोल की कुछ बूंदे डालें।
लिटमस पेपर का रंग लाल से नीला हो जाए तो साफ है कि इस दूध में यूरिया की मिलावट है। दूध की कुछ बूंदों को फर्श पर गिराएं। अगर यह लकीर बनते हुए फैलने लगे तो जाहिर है कि दूध में पानी अधिक मिलाया हुआ है।
खोया की होशियारी से करें पहचान
एफएसओ पीके वर्मा का कहना है कि अधिकतर मिठाइयों को बनाने में खोया का इस्तेमाल होता है और त्यौहारों में इसी में मिलावट की सबसे अधिक आशंका होती है। खोया में मैदा, वनस्पति घी, सिंथेटिक दूध व आलू पाउडर मिलाया जाता है। अरारोट और स्टॉर्च की भी मिलावट की जाती है। मिलावटी मावे की जांच करने के लिए मावे में पानी मिलाएं और इसे फेटें।
फेटने से निकला मावा यदि ऐंठा हुआ और सख्त है तो साफ है कि इसमें वनस्पति घी इस्तेमाल किया गया है। यदि मावा ढीला पड़ जाता है तो इसमें रिफाइंड ऑयल की मिलावट होगी। अगर मावा फेटने के बाद भी चिकना और मक्खन जैसा मुलायम है तो यह शुद्ध होने का प्रतीक है।
तेल के खेल से बचे
एफएसओ विनय कुमार का कहना है ठंड में पाम ऑयल गाढ़ा हो जाता है। जिस डिब्बे में यह रखा हो उसे हिलाएं। मिलावटी पाम ऑयल के तेल में दो लेयर आपको साफ-साफ दिखाई देने लगती हैं। परखनली में सरसों का तेल कुछ मात्र में लें। उसमें नाइट्रिक एसिड की कुछ बूंदे डालें। फिर परखनली को स्प्रिट लैंप पर थोड़ी देर के लिए गर्म करें। मिलावट होने पर तेल का रंग पूरी तरह से लाल हो जाएगा।