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Siddharthnagar News: परीक्षा से छूटे तो जाम ने जकड़ा, बस में सीट के लिए मारामारी

Sun, 18 Feb 2024 10:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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जहां पाए जगह वही सो गए परीक्षार्थी रोडवेज परिसर में स्थित रैन बसेरा में कम जगह में परीक्षार्थी।
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सिद्धार्थनगर। पुलिस में भर्ती होने के लिए लिखित परीक्षा देने के लिए अभ्यर्थियों को घर से निकलने के बाद कई परीक्षाओं से गुजरना पड़ा। सफर में सीट के लिए जद्दोजहद की तो रात में रेलवे और बस स्टेशन पर सोने के लिए परेशानी से गुजरना पड़ा। परीक्षा संपन्न हुई और रोडवेज व रेलवे स्टेशन जाने के लिए निकले तो जाम ने पैर को जकड़ लिया। बस में बैठने को सीट के लिए धक्का मुक्की सहनी पड़ी है। ऐसा परीक्षार्थियों ने बातचीत में बताया।
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देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, बस्ती, बलरामपुर जनपद के जिन बच्चों की परीक्षा सुबह 10 बजे से थी वह रात में ही जिले में पहुंच गए थे। नगर में बुद्ध विद्यपीठ डिग्री कॉलेज, सिहेंश्वरी इंटर कॉलेज, बाल शिक्षा सदन इंटर कॉलेज आसपास है। तीनों का आवागन स्टेशन रोड से होता है। दोनों पाली में तीनों केंद्रों पर तीन हजार से अधिक बच्चे परीक्षा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। दोपहर 12 बजे और शाम पांच बजे जब पेपर छूटा तो जाम की स्थिति बन गई। सोहांस मोड से सिद्धार्थ तिराहा तक लगभग 20 मिनट वाहनों की रफ्तार थम गई। इसमें परीक्षार्थियों को कठिनाई झेलनी पड़ी। रोडवेज और रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो जाम का खत्म हुआ। हालांकि जाम न हो इसके लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात रही। जो पेपर छूटने से पहले ही बड़े वाहनों को रोक दे रहे थे। बावजूद इसके जाम की स्थिति बन गई।
परीक्षा देने आए कुशीनगर के जितेंद्र यादव ने बताया कि उनका घर बिहार बार्डर के पास है। शनिवार सुबह ही घर से निकल गए थे। जिससे परीक्षा केंद्र पर शाम को ही पहुंच जाएं। घर से निकलने से लेकर परीक्षा देने तक में कई प्रकार की परेशानी हुई। देवरिया के महेश गौंड ने कहा कि ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं थी। देवरिया के ही रमेश कुशवाहा ने बताया कि समय से पहुंच गए थे। रोडवेज पर बने रैन बसेरा में जगह मिल गई थी। लेकिन खाना और पानी बहुत महंगा मिला। 20 रुपये के पानी को 25 से 30 रुपये देना पड़ा। ट्रेन नहीं पकड़ पाए थे। बस में खड़े होकर आना पड़ा।जिन परीक्षार्थियों का केंद्र शोहरतगढ़, बांसी, डुमरियागंज और इटवा में था, उन्हें ठहरने में और कठिनाइयों से गुजरना पड़ा।
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