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बच्चों की आईसीयू की नर्सों के भरोसे पूरा अस्पताल

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बच्चों की आईसीयू की नर्सों के भरोसे पूरा अस्पताल
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सिद्धार्थनगर। गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज के लिए बने जिस एसएनसीयू और पीकू वार्ड में तैनात नर्सों के भरोसे पूरा अस्पताल है। निर्धारित मानक से कम नर्सों के भरोसे बच्चों की देखरेख पर असर पड़ता है। एसएनसीयू और पीकू वार्ड में भी मानक से कम नर्सों की तैनाती है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बावजूद नर्सों की कमी से इलाज प्रभावित हो रहा है। जिला अस्पताल में मानक के अनुसार 180 नर्स की तैनाती होनी चाहिए। इस अस्पताल में आईसीयू, पीकू, एनआरसी और विभागीय सहित कुल 50 नर्स तैनात हैं। इस कारण अस्पताल की इमरजेंसी, वार्ड, ओटी, एसएनसीयू, पीकू सहित लेबर रूम में नर्सों की संख्या बहुत कम है।
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यहीं कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में 31 नर्सों को अयोध्या और झांसी से बुलाना पड़ा था। जिला अस्पताल में 216 बेड है, जबकि एमसीएच विंग में 100 से अधिक बेड पर मरीजों का इलाज के लिए नर्सों की जरूरत है। नर्स की उपस्थिति में कमी पर डॉक्टरों को भी खरी खोटी सुनने की नौबत आ रही है। हालांकि मेडिकल कॉलेज में नर्स के 175 पद स्वीकृत हैं।
इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टेंडर्ड के अनुसार शैक्षणिक संस्थान के अस्पताल में 500 बेड पर एक चीफ नर्सिंग स्टॉफ, 400 बेड पर एक नर्सिंग सुपरिटेंडेंट, 300 बेड पर एक डिप्टी नर्सिंग स्टाफ और उसके बाद प्रति 200 बेड की वृद्धि पर एक डिप्टी नर्स की तैनाती होनी चाहिए। इसी प्रकार 100 बेड पर एक असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट और 30 बेड पर एक वार्ड सिस्टर होनी चाहिए, जबकि आईसीयू में तीन बेड पर एक स्टॉफ नर्स की तैनाती होनी चाहिए। तीन शिफ्ट में ड्यूटी और अवकाश के लिए कुल संख्या की अपेक्षा 30 प्रतिशत नर्स अतिरिक्त होनी चाहिए।
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एसएनसीयू, पीकू वार्ड में 43 नर्स तैनात हैं, जबकि मानक के अनुसार 57 नर्स होनी चाहिए। जिला अस्पताल के स्वीकृत 14 पद में मात्र चार नर्स ही जिला अस्पताल में कार्यरत हैं। जिला अस्पताल की अधीक्षक डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि नर्सों की तैनाती के लिए प्राचार्य को जानकारी दी गई, नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है।
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