राप्ती नदी हुई स्थिर, पांच नदियां हटने लगी पीछे
- बाढ़ प्रभावित हुए 470 गांव, 181 गांव हैं संपर्क विहीन
- नदियों का जलस्तर कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में शुक्रवार को 17वें दिन राप्ती नदी स्थिर हुई, जबकि अन्य पांच नदियों का जलस्तर कम होने से लोगों को तसल्ली मिली। प्रमुख नदी बूढ़ी राप्ती एक दिन पहले बृहस्पतिवार को ही घटने लगी थी। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार जिले में बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या 470 हो गई है, जबकि 181 गांव संपर्क विहीन हो गए हैं। लगातार बाढ़ के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ने लगी है।
जिले में शुक्रवार को बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, घोघी, तेलार, जमुआर का जलस्तर कम हुआ है। इस कारण बाढ़ के पानी से बाधित कुछ मार्गों पर पानी कम होने से राहत मिली। जिले में संपर्क विहीन 181 गांवों में 145 नाव व 16 मोटर बोट लगाई गई है, जबकि ग्राम पंचायतों की भी कुछ नाव उपयोग में लाई जा रही है। एडीएम सीताराम गुप्ता ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। जहां भी आवश्यकता है, वहां नाव, राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
रिकॉर्ड तोड़कर स्थिर हुई राप्ती नदी
राप्ती नदी का जलस्तर अपने पिछले सभी रिकार्ड को तोड़कर स्थिर हो गई है। अभी तक राप्ती नदी का उच्चतम जलस्तर 85.88 मीटर तक ही रहा। शुक्रवार की सुबह इसका जलस्तर 85.95 मीटर तक पहुंचकर स्थिर हो गया। वहीं बूढ़ी राप्ती नदी घटने के बावजूद खतरे के निशान 85.650 से ऊपर बनी हुई है, वर्तमान में इसका जलस्तर 87.320 मीटर है। कूड़ा नदी और जमुआर भी खतरे के निशान से उपर बनी हुई है, वहीं घोघी, बानगंगा, तेलार खतरे के निशान से नीचे है।
सुबह हुई बारिश
बाढ़ के दौरान शुक्रवार की सुबह बारिश के कारण लोग चिंतित हो गए थे। आचार्य नरेंद्र कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या से संचालित कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना के अनुसार शुक्रवार को 4 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिक सूर्य प्रकाश सिंह ने बताया कि कहीं कहीं हल्की बारिश हो सकती है।