फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: आबादी बढ़ी, जलापूर्ति के संसाधन नहीं बढ़े

विज्ञापन
विज्ञापन
-20 साल पुराने ओवरहेड टैंक से होती है अभी तक हो रही आपूर्ति
विज्ञापन

-पुराने शहर पुरानी नौगढ़ में पेयजल के लिए लोग परेशान
- कागजी दावा 30 हजार आबादी को हर दिन आपूर्ति किया जाता है छह लाख लीटर पानी

- पानी गंदा आने के कारण 70 प्रतिशत आबादी हर माह खरीदती है लाखों का पानी

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। जलापूर्ति के लिए हर गांव में ओवरहेड टैंक बनाए जा रहे हैं, लेकिन पुराने नौगढ़ में लगभग 20 वर्ष पहले बने ओवरहेड टैंक से जलापूर्ति की जा रही है। पुरानी नौगढ़ में सुविधाएं बढ़ने के बजाय और गंभीर होती जा रही है। तीन वार्ड की तकरीबन 30 हजार आबादी को शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है। 20 साल में आबादी डेढ़ गुना बढ़ गई। जाहिर है पानी की जरूरत और मांग बढ़ गई, जबकि हर साल 400 नए कनेक्शन जुड़ रहे हैं। जो पानी आ रहा है, वह भी पीने योग्य नहीं रहता है। इसलिए 70 प्रतिशत आबादी पीने के लिए पानी खरीदती है। स्थानीय लोग हर माह लाखों रुपये पानी पर खर्च कर देते हैं।
-
प्रेशर बढ़ा तो बालू और पाइप फटने का डर

नगर पालिका की टंकी की क्षमता छह लाख लीटर है। पूरा पानी स्टोर किया जाता है। इसके बाद आपूर्ति की जाती है। स्थिति यह है कि जल्दी टंकी भरने के चक्कर में मोटर का प्रेशर बढ़ाते हैं तो बालू और मिट्टी आ जाती है। साथ ही पाइप पुरानी होने के कारण फटने का डर बना रहता है, लेकिन तीन वार्ड को पानी पहुंचाने के लिए तेजी करनी पड़ती है, जिससे कई प्रकार की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
विज्ञापन


-

पानी बढ़ने के बजाय हर हिस्से में हो गई कम

20 वर्ष से अधिक समय जब जलापूर्ति के लिए टंकी बनी थी, तो लगभग 15 हजार आबादी पुरानी नौगढ़ कस्बे की थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक 30 हजार से अधिक हो गई है। तब एक व्यक्ति के हिस्से में 30-35 लीटर पानी आता था, लेकिन आज वह पानी घटकर 17-18 लीटर प्रति व्यक्ति हो गया है। जरूरत बढ़ी, लेकिन टंकी की क्षमता वही छह लाख लीटर ही है। जिसे आबादी के हिसाब से दो से ढाई गुना करने की जरूरत है।

-

10 लाख से अधिक का प्रतिमाह खरीदते हैं पानी

भगत सिंह नगर, सुभाष नगर और सरयू नगर सात मोहल्लों का तीन वार्ड है। यहां तकरीबन 30 हजार से अधिक आबादी है। आठ में छह परिवार ऐसा है जो आपूर्ति का पानी, नहाने, बर्तन और कपड़े धुलने में प्रयोग करता है। पीने के लिए जार का पानी लेता है। एक माह में लगभग 10 लाख रुपये का पानी यहां के लोग खरीदकर पीते हैं। आपूर्ति का पानी 30 प्रतिशत ऐसे लोग पीते हैं, जो हर माह 900 रुपये खर्च करके जार का पानी नहीं ले सकते हैं। नगर के भगत सिंह वार्ड निवासी रहमत ने बताया कि कभी- कभी पानी इतना गंदा आता है कि पीने योग्य नहीं होता। अगर पीएं तो बीमार होने का डर रहता है। वहीं, सबीहा ने कहा कि हैंडपंप है नहीं, इसी पानी पर नहाना, खाना और कपड़ा धुलना सब कुछ निर्भर है। बिजली रहती है तो पानी आता है। यही नहीं रही तो घंटों इंजतार करना पड़ता है। यही पीड़ा अन्य लोगों की भी है, लेकिन जिम्मेदार इससे अनजान हैं। वहीं, चिकित्सक दूषित पानी सेहत के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं।

-

सर्वे हुआ, लेकिन नहीं बदली गई पाइप

नगर पालिका से जुड़े एक कर्मचारी के मुताबिक पाइप बदलने के लिए दो बार सर्वे हो चुका है। जल निगम के साथ नगर पालिका सर्वे करा चुकी है, लेकिन एक साल से अधिक का वक्त गुजर गया, पाइप नहीं बदली गई। अगर पाइप बदल दी गई होती तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो जाता।

-

जलापूर्ति का समय

नगर पंचायत कर्मी के मुताबिक जलापूर्ति सुबह पांच से दोपहर 12 बजे तक की जाती है। इसके बाद शाम चार से रात 11 बजे तक की जाती है।

-

बोले नगर के लोग

टंकी बने 20 वर्ष से अधिक हो गया है। इसका निर्माण धनराज यादव के मंत्री रहते हुआ। तब से आज में आबादी दो गुना हो गई। पानी की जरूरत बढ़ गई, लेकिन आज भी एक ही टंकी से पूरे शहर को पानी दिया जाता है। जलापूर्ति और बेहतर बनाने की जरूरत है।
विज्ञापन


-मुन्ना लाल, कसौधन
-

आपूर्ति का पानी बहुत ही खराब आता है। बर्तन में रखने के बाद बालू और कचरा नीचे दिखने लगता है। नहाने और कपड़ा धुलने योग्य नहीं रहता है। पीने पर बीमार पड़ना तय है। बोरिंग दोबारा कराने के साथ ही और नई टंकी बनाने की जरूरत है। तब जाकर पर्याप्त पानी मिल पाएगा। पीने के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है।

-प्रदीप अग्रहरि

-

बोले जिम्मेदार

अगर पानी दूषित आ रहा है, तो उसे सही कराया जाएगा। जल निगम के साथ सर्वे कराकर पाइप सही करने के साथ ही अन्य समस्याएं दूर की जाएंगी।

-विंध्याचल, ईओ, नगर पालिका, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें