जिला अस्पताल में खुलेगा 42 बेड का पीआईसीयू वार्ड
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला चिकित्सालय में 42 बेड का पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट) बनाया जाएगा। इसके लिए शासन की ओर से स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द ही वार्ड बनाने का काम शुरू होगा। इसमें गंभीर रूप से बीमार शिशुओं का उपचार हो सकेगा।
जिले की 27 लाख की आबादी है। नवजात व शिशुओं के उपचार के लिए जिला अस्पताल में 22 बेड का एसएनसीयू एवं 15 बेड का पीआईसीयू है। कई बार बीमार बच्चों की संख्या अधिक हो जाने पर एक बेड पर दो बच्चों को भर्ती करना पड़ता है। नया पीआईसीयू वार्ड बनने के बाद गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज में सुविधा मिलेगी।
कुछ साल पहले जेई-एईएस जैसे खतरनाक बीमारी की चपेट में आकर बच्चे और नवजात हर वर्ष असमय काल के गाल में समा जा रहे थे। बीमारी से निपटने और हर बच्चे का समय से उपचार होने के लिए एसएनसीयू और पीआईसीयू वार्ड बनाए गए थे। अब इन वार्डों में इलाज के लिए बेड संख्या कम पड़ गई है। नए वार्ड के लिए कागजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उम्मीद है कि जल्द ही वार्ड बनाने का काम शुरू हो जाए।
20 बेड का संचालित है वार्ड
मौजूदा समय में जिला अस्पताल में जन्म से एक माह के भीतर के शिशुओं को रखने के लिए 15 बेड का पीआईसीयू वार्ड संचालित है। 42 बेड का अलग वार्ड बनने से संख्या बढ़कर 57 हो जाएगी। ऐसे में एक साथ 57 बच्चे भर्ती किए जा सकेंगे।
निजी अस्पताल में इलाज महंगा
जन्म के बाद सांस लेने में तकलीफ या अन्य दिक्कत होती है तो नवजात को एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ता है। अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं होने पर लोगों को आसपास के महंगे अस्पताल में जाने की मजबूरी होती है, जहां अधिक खर्च करना पड़ता है। जन्म से 28 दिन तक के नवजात एसएनसीयू में एवं 28 दिन से 18 वर्ष तक बच्चे पीआईसीयू में भर्ती किए जाते हैं।
पीआईसीयू का एक और वार्ड बनाने की स्वीकृति मिली है। शासन ने मंजूरी दे दी है। यह वार्ड 42 बेड का होगा। भारत सरकार के प्रोजेक्ट के अंतर्गत वार्ड बनाया जा रहा है। लखनऊ से यहां उपकरण भेजे जाएंगे, जिसमें इंस्टाल करके वार्ड बना दिया जाएगा। -डॉ. सलिल कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज, सिद्धार्थनगर