बढ़ते गए मरीज व बेड, नहीं बढ़े सफाई कर्मचारी
सिद्धार्थनगर। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बावजूद संयुक्त जिला चिकित्सालय में कर्मचारियों की कमी से सफाई व्यवस्था चुनौती बन गई है। अस्पताल के 330 बेड के अनुसार सफाई कर्मचारियों की संख्या 66 होनी चाहिए, जबकि 14 के भरोसे ही काम हो रहा है। सफाई कर्मियों के काफी प्रयास के बावजूद अस्पताल पूरी तरह साफ नहीं हो पा रहा है, क्योंकि काम और मानव संसाधन में असंतुलन बन जाता है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में रिकॉर्ड के अनुसार, 64 बेड हैं, जबकि मुख्य अस्पताल में 216 बेड पर मरीजों को भर्ती करके इलाज किया जा रहा है। एमसीएच विंग के 114 बेड से अधिक के अस्पताल में भी मरीजों को भर्ती करने की तैयारी शुरू हो गई है। आउटसोर्सिंग एजेंसी के एक सफाई कर्मचारी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में सफाई कर्मियों की तैनाती से पहले एमसीएच विंग में मरीजों की भर्ती शुरू हो गई तो सफाई व्यवस्था और बड़ी चुनौती हो जाएगी। जब अस्पताल 64 बेड का ही था, तब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की संख्या निर्धारित की गई थी। अब बेड की संख्या पांच गुनी हो गई है। एसएनसीयू, पीआईसीयू, ऑपरेशन थियेटर एवं लेबर रूम में सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
काफी प्रयास के बावजूद बेहतर सफाई नहीं हो पा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टेंडर्ड के अनुसार पांच बेड पर एक सफाई कर्मचारी का मानक है। मेडिकल कॉलेज की सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल में 11 सफाई कर्मचारी थे। मानव संसाधन एजेंसी से तीन और कर्मचारी मांगे गए हैं। मेडिकल कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति होने के बाद सफाई व्यवस्था और बेहतर हो जाएगी।
इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव के मोबाइल पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा।