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तेजी से बढ़ रहा राप्ती नदी का जलस्तर, बूढ़ी राप्ती स्थिर

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बांसी क्षेत्र के कटहा गांव बाढ़ का पानी आने के बाद घर का सामान सिर पर ले जाते ग्रामीण। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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तेजी से बढ़ रहा राप्ती नदी का जलस्तर, बूढ़ी राप्ती स्थिर
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- 387 गांव बाढ़ से प्रभावित, 181 हुए संपर्क विहीन
- जिले में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं चार नदियां
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। वहीं बूढ़ी राप्ती का पानी स्थिर हो गया है। इधर बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 387 हो गई है। जबकि 181 गांव संपर्क विहीन (मैरूंड) हो गए हैं।
15 दिनों से बाढ़ के कारण लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही है। जिले में बृहस्पतिवार को राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ा, जबकि बूढ़ी राप्ती के घटने की शुरूआत पर लोगों को तसल्ली मिली। फिलहाल जिले में चार नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
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जिला प्रशासन के अनुसार जिले में डेढ़ लाख से अधिक आबादी बाढ़ प्रभावित है। जिले के बांधों में 360 स्थानों पर रिसाव का जोखिम बना हुआ है। डुमरियागंज क्षेत्र के परानपुर में बुधवार की रात में बाढ़ में सड़क कट गई। 387 बाढ़ प्रभावित गांवों में महज 145 नाव व 16 मोटर बोट लगाए गए हैं, इस कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ राहत कार्य में 69 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। 49 बाढ़ राहत वितरण केंद्र बनाए गए हैं। एक यूनिट फ्ल्ड प्लाटून पीएसी एवं करीब 30 दक्ष लोगों से मुुस्तैद एनडीआरएफ की टीम लगी है। डीएम दीपक मीणा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 387 हो गई है। डेढ़ लाख से अधिक आबादी प्रभावित है। राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
राप्ती नदी से तोड़े सारे रिकॉर्ड
राप्ती नदी अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 85.89 मीटर के निशान पर बह रही है। खतरे का निशान 84.90 है। अब तक उच्चतम जलस्तर 85.88 रहा है। बूढ़ी राप्ती घटने के बावजूद खतरेे निशान से 1.89 मीटर ऊपर बह रही है। इसका जलस्तर 87.54 है। तसल्ली है कि छोटी नदियों का जलस्तर कम होने लगा है। कूड़ा नदी का जलस्तर 84.72 है, यह 1.10 मीटर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जमुआर भी खतरे के निशान ऊपर बनी हुई है। जिसका वर्तमान जलस्तर 85.15 है। बान गंगा, तेलार व घोघी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं।
ग्रामीणों ने रोका बांध का रिसाव
बांसी प्रतिनिधि के अनुसार राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से लोगों में भय का माहौल है तथा तटबंधों में हो रहे रिसाव से लोग काफी चिंतित हैं। नदी के जलस्तर बढ़ने की वजह से घरों की नीव, फर्श व नल से पानी निकल रहा है। इस नदी के तट पर बने बांसी पनघटिया, सोनखर हाटा, बांसी डुमरियागंज, डुमरियागंज बांसी बांध पर कई स्थान पर लगातार रिसाव हो रहा है जिसका बचाव कार्य चल रहा है।
बांसी पनघटिया बांध पर गुल्हरिया लाला गांव के पास तेज रिसाव हो रहा था, जिसे सिंचाई विभाग व गांववासियों ने काफी मेहनत कर बृहस्पतिवार की शाम तक रोक लिया। हालत यह है कि इस बांध पर गुल्हरिया लाला, भगौतापुर, बंजरहा, भुहीघाट,डुमरिया पांडे सहित एक दर्जन से अधिक स्थलों पर रिसाव जारी है। यहीं हाल डुमरियागंज बांसी व सोनखर हाटा बांध का है। इस बांध पर भंवारी गांव के पश्चिम दस दिनों से रिसाव जारी है। इन बांधो पर बचाव कार्य जारी है। बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बांसी-पनघटिया 0 से 16 किमी. तक बंधे का निरीक्षण किया गया। इस दौरान उनके साथ एसडीएम जगप्रवेश, सीओ अरूणचंद्र व सिंचाई विभाग के अभियंता मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता सिंचाई निर्माण खंड सिद्धार्थनगर को निर्देश दिया कि वह बंधों की निगरानी करते रहे व सुरक्षित रखे।
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बाढ़ का पानी कम होने से राहत
परसा। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के खैरी शीतल प्रसाद गांव में बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर कम होने से बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है परंतु अभी भी कुछ मार्ग बाधित है। रास्तों पर अभी भी पानी भरा हुआ है जिससे टोले वासियों को आवागमन काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उस टोला में आवागमन के लिए नाव का भी प्रयोग करना पड़ रहा है। चिरहगना-पन्नापुर मार्ग, मुरव्वनडीह मार्ग पर पानी बह रहा है। नकोलडीह जाने वाले मार्ग पर भी पानी बह रहा है।
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