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श्रावस्ती को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने वाला हो प्रतिनिधि

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श्रावस्ती। इंडो-नेपाल सीमा से सटा श्रावस्ती जिला उद्योग शून्य होने के साथ ही यहां युवाओं के लिए रोजगार के कोई भी अवसर उपलब्ध नहीं हैं। जबकि जिले में विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे में युवाओं ने जिले को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने वाले तथा जिले का पिछड़ापन दूर करने वाले को ही सदन भेजने का मन बनाया है।
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बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती को विश्व मानचित्र पर भले ही सर्वोच्च स्थान प्राप्त हो। लेकिन अभी इसके विकास के लिए बहुत कुछ होना बाकी है। इसके साथ ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पुत्र लव व कुश की जन्मस्थली का गौरव प्राप्त इकौना का सीताद्वार मंदिर व झील भी उपेक्षित है। वहीं सिरसिया के शिवालिक पर्वत माला से सटा प्राचीन पांडव कालीन विभूनिाथ मंदिर भी प्रदेश के मानचित्र पर नहीं उभर पा रहा है।
किवदंतियों के अनुसार जहां लक्ष्मण जी ने माता सीता को जंगल छोड़ने के लिए रथ से उतारा था। वह गिलौला क्षेत्र का पचदेवरी काली स्थान तथा जमुनहा में राप्ती नदी के तट पर स्थित जगपति माता मंदिर सहित गाजी सरकार के बड़े पिता बड़े पुरुष की मजार भी सोनवा थाना क्षेत्र के दिकौली में स्थित है। जहां प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में लोगों का आना जाना होता है।
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इसके बावजूद न तो यहां समुचित विकास कराया गया और न ही इसे पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा सका है। जबकि यदि इनका कायाकल्प व समुचित विकास हो तो न सिर्फ स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। बल्कि इन क्षेत्रों का तेजी से विकास भी होगा। ऐसे में इससे मायूस जिले के लोगों ने भिनगा व श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र में जिले को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने व जिले के चहुंमुखी विकास को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है। लोगों का कहना है जो जिले का चहुंमुखी विकास के साथ रोजगार के अवसर मुहैया कराएगा उसे ही 27 फरवरी को वोट करेंगे।
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