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विद्यालयों का अनुशासन ऐसा हो कि बच्चों के आत्म सम्मान पर न हो चोट

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श्रावस्ती। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा गुरुवार को भिनगा के सनराइज पब्लिक स्कूल सत्तीचौरा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। बाल अधिकार, महिला अधिकार तथा अन्य विधिक कानून से संबंधित जानकारी के लिए आयोजित इस शिविर की शुरुआत प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
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इस दौरान प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा पाने का अधिकार है, सभी बच्चे के लिए प्राथमिक स्तर की शिक्षा नि:शुल्क एवं अनिवार्य होनी है। विद्यालयों में अनुशासन बच्चों के आत्म सम्मान को चोट पहुंचने वाला कदापि न हो। बाल अधिकार की जागरूकता के लिए विश्व मे अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार सप्ताह मनाया जाता है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग जिसे एनसीपीसीआर कहते हैं। उसका गठन किया गया। बाल अधिकार कानून का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसकी वजह से लोगों मे जागरूकता का प्रचार हुआ है।
यही वजह है कि अब बच्चों के खिलाफ होने वाले शोषण और अपराधों में पहले के मुकाबले में कमी आई है। इस दौरान सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने महिला अधिकार पर कहा कि आज समाज में महिला उत्पीड़न, लिंग, भेद जैसी चीजें हो रही हैं। बहुत सी महिलाओं के लिए यह सब उनके जीवन का हिस्सा बन चुका है। अगर जीवन मे आगे बढ़ना है तो इन बाधाओं को पार करना ही होगा। भारतीय संविधान में महिलाओ की सुरक्षा और समानता से जुड़े कई कानून बनाए गये हैं। इस दौरान अधिवक्ता अशोक शर्मा, पुनीत कुमार मिश्र, सांवल प्रसाद, वैष्णवी सिंह, दयाराम सहित काफी संख्या में छात्र छात्राएं मौजूद रहीं।
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