भिनगा के राजषि काली मंदिर में चैत्र नवरात्र पर पूजन अर्चन करते लोग व सजी दुकानें
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श्रावस्ती। आदि शक्ति जगदंबा की आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्र शनिवार से प्रारंभ हो चुका है। देवी आराधना के पहले दिन देवी भक्तों ने माता रानी के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना किया। इसके साथ ही देवी मंदिरों पर पहुंचे भक्तों ने मां की विधि विधान पूर्वक पूजन-अर्चन कर सुख व समृद्धि की कामना किया।
चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को वर्ष प्रतिपदा व युगादि भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि का सृजन किया था। माना जाता है कि नवरात्र में देव शक्तियां धरती पर उतरती हैं। जो अपने माध्यम चुनती हैं। इसी के क्रम में चैत्र नवरात्र की शुरुआत पर देवी भक्तों ने पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की आराधना की। देवी भक्तों ने मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान कर अपने अंदर सरलता सादगी और प्रेम जागृत करने के साथ ही दैहिक, दैविक व भौतिक कष्टों को दूर कर कर्तव्य पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहने की कामना की। इसके साथ ही लोगों ने अपने घरों में कलश स्थापना कर नौ दिन का व्रत भी प्रारंभ कर दिया।
नवरात्र की पहली भोर होते ही देवी मंदिरों में घंटा घड़ियाल बज उठे। इस दौरान बंदे वांछित लाभाय चंद्रार्घकृतशेखराम, वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम... आदि मंत्र से मंदिर परिसर गुंजायमान रहे। इस मौके पर भिनगा के राजर्षि काली मंदिर, इकौना के बेचूबाबा, माता ज्वाला देवी मंदिर, जमुनहा के जगपति धाम, सिरसिया के दुर्गामंदिर, गिलौला के झारखंडी व सदाशिव महादेव मंदिर सहित क्षेत्र के अन्य देवी मंदिरों पर पहुंच कर श्रद्धालुओं ने माथा टेका।