उधर, गोहरनी गांव के जंगल में जिला न्यायालय कार्यालय एवं आवासीय भवनों के लिए भूमि चिन्हित हो चुकी है। न्यायालय कार्यालय और आवासीय भवनों के लिए एस्टीमेट जिला मुख्यालय से शासन और उच्च न्यायालय इलाहाबाद जा चुका है। छह साल पहले 208 करोड़ रुपये बाद में डेढ़ साल पहले 298 करोड़ रुपये का जिला न्यायालय और आवासीय भवनों के लिए एस्टीमेट पीडब्ल्यूडी से तैयार कराया था। शासन से अभी तक कोई भी धनराशि अवमुक्त नहीं हुई है।
जिला मुख्यालय बनने के बाद शामली जिला मुख्यालय पर आधुनिक बस अड्डा नहीं है। नगर पालिका परिषद की किराए के भवन में बस अड्ड़ा चल रहा है। किराए के भवन में भूमि कम होने पर बस सड़कों पर आकर रुकती है। वर्ष 2015 में मुजफ्फरनगर मार्ग पर फतेहपुर गांव के जंगल में नौ बीघा भूमि रोडवेज डिपो कार्यशाला के लिए आरक्षित की गई थी। पिछले कई सालों से नौ करोड़ रुपये का रोडवेज डिपो की कार्यशाला के लिए इस्टीमेट स्वीकृत होकर निगम मुख्यालय को भेजा गया था। प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा, सांसद प्रदीप चौधरी, विधायक तेजेंद्र निर्वाल की पैरवी कर चुके हैं। जिले में सालों बाद भी डिपो कार्यशाला के इस्टीमेट की धनराशि अवमुक्त नहीं हो पाई है।
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डीएम आवास कॉलोनी के लिए 26 करोड़ की धनराशि चारदीवारी जनसुविधाओं के लिए शासन से मांगा था। विकास भवन निर्माण के लिए नौ करोड़ और बीएसए कार्यालय की 80 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त नहीं हो पाई है।