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विद्यालयों में नामांकन पर जोर, बच्चों को नहीं मिली नई पाठ्य पुस्तकें

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विद्यालयों में नामांकन पर जोर, पुरानी किताबों से कराई जा रही पढ़ाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद परिषदीय विद्यालय खुले 20 दिन हो चुके हैं। नए बच्चों के नामांकन पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन बच्चों को नई किताबें नहीं मिली हैं। बच्चों को पुरानी किताबें भी पूरी नहीं मिल सकी हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा एक से आठ तक के 596 विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में शासन की तरफ से नए बच्चों के नामांकन कराने और विद्यालयों में उनकी शत प्रतिशत उपस्थित पर जोर दिया जा रहा है। बच्चों के पास पढ़ने के लिए किताबें नहीं हैं। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को शासन की तरफ से नि:शुल्क पाठय पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती है। नया शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो गया था। 20 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहा और 16 जून से फिर विद्यालय खुले हुए हैं।
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अवकाश के बाद विद्यालय खुले हुए करीब 20 दिन हो गए, लेकिन बच्चों केे शासन स्तर से अभी नई किताबें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। पिछले साल की किताबों से ही जैसे तैसे पढ़ाई का काम चलाया जा रहा है। गांव सिंभालका के उच्च माध्यमिक कंपोजिट विद्यालय की कक्षा पांच की छात्रा शिवानी ने बताया कि उसके पास सिर्फ एक किताब है। कक्षा चार की छात्रा मानसी ने बताया कि उसके पास दो-तीन किताबें हैं। अधिकतर बच्चों की किताबें फटी हुई हैं। नए बच्चों के पास किताबें नहीं होने से उन्हें दूसरे बच्चों के साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। विद्यालय की शिक्षिका रुचि चौधरी व मीनाक्षी ने बताया कि अभी नई किताबें नहीं आई हैं। पुरानी किताबों से पढ़ाई कराई जा रही है। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि पिछले साल के बच्चों से पुरानी किताबें ली गई थीं, उन्हें इस साल बच्चों को दिया गया है। यही हाल जिले के अन्य विद्यालयों का है। वहीं, बेसिक शिक्षा के जिला समन्वयक अमित कुमार का कहना है कि शासन से अभी नई पाठय पुस्तकें नहीं आई हैं। पाठय पुस्तकें प्राप्त होते ही बच्चों को वितरित की जाएंगी।
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