बाबरी क्षेत्र के गांव गोगवान जलालपुर की महिला कविता
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बाबरी। प्रधानमंत्री आवास योजना कई गरीबों के लिए दूर की कौड़ी साबित हो रही है। मकान के लिए ऐसे लोग करीब 10 वर्षों से पूर्व प्रधान व अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई। भीषण ठंड में तिरपाल, छप्पर और कच्चे जर्जर मकानों में सर्द रात गुजारनी पड़ रही है।
बाबरी क्षेत्र के गांव गोगवान जलालपुर में राजपाल अपनी पत्नी वीरमती के साथ कच्चे खंडहर मकान में रह रहा है। राजपाल ने बताया कि पिछले 15 वर्षों से कच्चे मकान को बनवाने के लिए ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, बीडीओ, डीएम समेत सभी से मकान बनवाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक किसी ने भी कच्चे मकान को बनवाने के आश्वासन के अलावा कुछ नहीं किया। राजपाल ने बताया कि बरसात में मकान का एक कमरा गिर गया था। जिसमें पति-पत्नी दबने के चलते घायल हो गए थे। राजपाल ने बताया कि उनके 3 पुत्रियां है तीनों की शादी कर दी गई है। अब दोनों पति-पत्नी वृद्ध हो गए हैं। भैंस पालन करने के बाद दूध बेचकर जीविका चला रहे हैं। बरसात में मकान गिरने के कारण सामान पड़ोस में रखकर खाना बनाना करते हैं लेकिन सोते अपने ही खंडहर कच्चे मकान में हैं।
गांव निवासी कविता शर्मा ने बताया कि करीब 8 वर्षों से छप्पर पर तिरपाल डालकर अपनी लड़की निधि के साथ गुजर बसर कर रही है। कई बार ग्राम प्रधान सहित अधिकारियों को भी समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन किसी ने भी आज तक सुध नहीं ली है। जिसके चलते तिरपाल झोपड़ी में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। कविता शर्मा ने बताया कि 2018 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण कराया गया था, लेकिन केवल 6 हजार रुपये की एक ही किश्त आई है। कई चक्कर लगाने के बाद भी दूसरी किस्त नहीं मिली है, जबकि शौचालय निर्माण पूर्ण किया गया है। कविता शर्मा ने बताया उनके पति का निधन करीब 6 वर्ष पूर्व हो गया था। कमाई का कोई साधन नहीं है उनकी तीन संतान हैं। बड़ी लड़की की शादी हो गई है। जबकि बच्चे अपनी मौसी के यहां रहकर पढ़ाई के साथ मजदूरी भी करते हैं।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ठाकुर जयप्रकाश राणा ने बताया कि गांव से 26 पात्रों की सूची भेजी गई है। लाभार्थियों के आवास योजना के तहत पास हुए हैं जल्द ही मकान निर्माण शुरू कराए जाएंगे।