शामली। जिले में एलर्जी के मरीज सरकारी और निजी अस्पताल में आ रहे हैं। एलर्जी के वैसे तो कई कारण होते है, लेकिन साफ-सफाई न होने और खानपान सही न होना इसकी मुख्य वजह मानी जाती है। एलर्जी होने पर समय रहते चिकित्सक की सलाह लेेकर उपचार कराना चाहिए।
हर साल 16 अक्तूबर को विश्व एलर्जी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को एलर्जी से बचाव के लिए जागरूक करना होता है। जिले में एलर्जी के मरीजों की संख्या कम नहीं है। सरकारी और निजी अस्पतालों में रोजाना एलर्जी के मरीज बड़ी संख्या में आते हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि एलर्जी का सही समय पर उपचार कराना चाहिए। इसमें लापरवाही नुकसानदायक हो सकती है। एलर्जी कई तरह की होती है। जिसमें किसी दवा के रिएक्शन करने से, किसी खाद्य पदार्थ का सेवन करने से, किसी पदार्थ को छूने या उसके संपर्क में आने पर त्वचा पर लाल चकते बनना, मौसमी एलर्जी जिसमें आंखों से पानी आना, छींकें आना आदि परेशानी होती है।
सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. रमेश चंद्रा का कहना है कि अस्पताल में रोजाना करीब 15 से 20 प्रतिशत एलर्जी के मरीज आते हैं, जिनमें अधिकतर त्वचा संबंधी एलर्जी खाज खुजली के केस होते हैं। एलर्जी के लिए अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं।
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एलर्जी के लक्षण:
छींक आना, खांसी होना, सिर दर्द या घबराहट होना।
आंखों से पानी आना या खुजली होना।
कान बंद होना।
साइनस, गले या कान के में खुजली होना।
मुंह से बलगम आना।
होंठ, जीभ, आंखों या चेहरे पर सूजन आना।
पेट में दर्द होना, उल्टी दस्त होना।
रूखी या सूखी लाल त्वचा होना।
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बचाव:
घर के पर्दे, तकिये आदि को गर्म पानी में धोकर सुखाएं।
पालतू जानवरों को घर से बाहर रखें।
घर में कालीन बिछाने से परहेज रखें।
घर को सूख व हवादार रखें।
घर के अंदर कपड़े न सुखाएं।
घर पर बना हुआ भोजन खाएं।
घर से बाहर निकलते समय आंखों पर चश्मा पहनें।
रोजाना नहाएं और धुले हुए साफ कपड़े पहने।
इत्र व सुगंध वाली चीलों का इस्तेमाल ज्यादा न करें।