शामली। सहालग में कारोबार में बूम आया है। शहर से लेकर कस्बों के गेस्ट हाउस और मैरिज हॉल इस समय दमक रहे हैं, बाजारों में भी रौनक है।
व्यापारियों का कहना है कि 15 दिसंबर तक चलने वाला सहालग पूरे साल का घाटा कम कर देगी। खास कमाई दुल्हन और दूल्हे के परिधानों की बिक्री से है। अब साड़ियों से अधिक कमाई लहंगा और शेरवानी की बिक्री में हो रही है।
शहर के कबाड़ी बाजार, बड़ा बाजार, नया बाजार, नेहरू मार्किट आदि कपड़ा बाजार में लहंगा और शेरवानी के एक से बढ़कर एक लेटेस्ट डिजाइन मौजूद है। जोड़े अपनी पसंद से शादी के दिन पहने जाने वाले कपड़ों को चुन रहे हैं। दुल्हन की पहली पसंद कढ़ाई व जरदोजी वाला लहंगा है तो दूल्हे का मन जोधपुरी शेरवानी पर है।
इनकी गुणवत्ता के साथ हाथ की कारीगिरी को युवतियां पसंद कर रही है। लहंगा में शिफॉन आदि के कपड़े खास पसंद किए जा रहे है। ऐसे लहंगे हल्के होते हैं और कढ़ाई उन पर चार चांद लगाती है। रंगों की बात की जाए तो मैरून रंग का लहंगा सबसे अधिक बिक रहा है। दुकानदार सोनू जैन व विपुल ने बताया कि पांच हजार से लेकर 20 हजार तक की रेंज में लहंगा मिल रहा है। साथ ही गाउनदार लहंगा भी पसंद किया जा रहा है। इसमें पर्पल, हरा रंग पसंद किया जा रहा है।
बताया कि भारी साड़ियों का चलन अब खत्म हो गया है। गार्डेन सिल्क और शिफॉन की साड़ियां भी लोग चढ़ावे के लिए ही खरीद रहे हैं।
n सफेद और क्रीम रंग की शेरवानी की अधिक मांग : शहर के मैन रोड स्थित दुकानदार कुशांत ने बताया कि दूल्हे की शेरवानी से गोल्डन रंग गायब हो गया है। अब सफेद और क्रीम रंग की शेरवानी अधिक पसंद की जा रही है। उसमें जोधपुरी लुक की खास मांग है। उस पर मैरून रंग की कढ़ाई वाला दुपट्टा पहना जा रहा है। सूट में रॉयल ब्लू रंग छाया हुआ है। दाम की बात की जाए तो शेरवानी की रेंज पांच हजार से 15 हजार रुपये तक की है।