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‘भाजपा ने विरोधी दलों का एजेंडा खत्म कर दिया’

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शामली। विधानसभा चुनाव से पहले कृषि कानून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वापस लिए जाने की घोषणा करके आम किसानों में असंतोष को खत्म करने का काम किया है। प्रधानमंत्री की घोषणा विधानसभा चुनाव में भाजपा को संजीवनी देने का काम किया है, वहीं आक्रामक विपक्ष से तीन कृषि कानूनों का मुद्दा छीन लिया है।
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भाजपा के सांसद-विधायक, वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मोदी की घोषणा के बाद भाजपा को विधानसभा चुनाव में किसानों का समर्थन मिलेगा। हालांकि विपक्षी नेताओं का कहना कि मोदी का तीनों कृषि कानून वापस लिया जाने का निर्णय देर आए दुरुस्त आए, हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी। भाजपा सरकार की नीयत और नीति किसान समझ चुका है। भाजपा को विधान सभा चुनाव में कोई लाभ नहीं मिल पाएगा।
पक्ष :
किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया
कृषि कानून वापस लिए जाने की प्रधानमंत्री की घोषणा स्वागत योग्य है। भाजपा सरकार ने किसानों की बात को गंभीरता से लेकर तीन कृषि कानून वापस लिए जाने की घोषणा की है। - प्रदीप चौधरी सांसद कैराना लोकसभा।
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प्रधानमंत्री का निर्णय स्वागत योग्य
प्रधानमंत्री ने तीन कृषि कानून वापस लिए जाने की घोषणा किसान हित में की है। उनका यह निर्णय स्वागत योग्य है। गन्ना मूल्य बढ़ाना और बकाया गन्ना भुगतान कराकर सरकार की मुख्य उपलब्धि है। - वीरेंद्र सिंह एमएलसी भाजपा।
शुभ दिन पर किसान हितों के लिए घोषणा
तीन कृषि कानून को वापस लिए जाने का फैसला स्वागत योग्य है। शुभ दिन पर घोषणा किसान हितों के लिए है। सरकार की साफ नीयत का परिणाम है। तीन कृषि कानून के मुद्दे पर जहां सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2021 तक स्थगित करने के आदेश दिए हैं। वहीं, भाजपा ने विरोधी दलों का एजेंडा खत्म कर दिया है। - तेजेंद्र निर्वाल भाजपा विधायक शामली।
किसानों का अंसतोष समाप्त किया
तीन कृषि कानून के विरोध में लंबे समय से दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे किसानों में भाजपा सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा था। पीएम मोदी ने तीन कृषि कानून को वापस लेकर संवेदनशीलता का परिचय दिया है। उनके निर्णय से किसानों में असंतोष खत्म होगा। लंबे समय बाद किसानों की मांग पूरा होना हर्ष की बात है। - मृंगाका सिंह, भाजपा महिला नेता, कैराना।
विपक्ष :
कानून वापस लिया जाना पूरी तरह राजनीतिक
केंद्र सरकार द्वारा किसानों के पुरजोर विरोध के बाद काले कानून को वापस लिए जाना पूरी तरह राजनीतिक है। यदि वास्तव में सरकार किसानों के हितों के लिए संवेदनशील होती, तो किसानों को अपने अधिकारों के हनन के लिए लंबे समय तक संघर्ष न करना पड़ता। यूपी चुनाव से पहले कानून पर वापसी का फैसला केवल चुनावी हथकंडा है। - ओमप्रकाश शर्मा पूर्व जिला अध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी शामली।
हजूर आते आते बहुत देर कर दी
गुरु पर्व के पावन दिन का तोहफा बताकर उन तीन कृषि बिलों को वापस लेने का ऐलान किया है। जिन तीन बिलों को देशभर का किसान काले बिल बताकर उसे वापस लिए जाने का विरोध कर रहे थे। किसान हित के लिए यह फैसला बहुत पहले लिया जाना चाहिए था। देर आए दुरुस्त आए, लेकिन हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी। - सवित मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान यूनियन।
सरकार पूंजीपतियों के लिए लाई थी कानून
मोदी सरकार पूंजीपतियों के लिए कृषि कानून लेकर आई थी। उन्हीं के दबाव के कारण पिछले एक साल से किसान आंदोलित थे। विपक्षी दलों को भी अनसुना किया जा रहा था। सरकार का कानून वापसी का फैसला पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जनसभाओं एवं विजय यात्राओं में उमड़ी भीड़ के बाद भाजपा का बड़ा निर्णय लेना पड़ा है। कृषि कानूनों की वापसी उसी का परिणाम है। - प्रो. सुधीर पंवार राष्ट्रीय प्रवक्ता समाजवादी पार्टी।
सरकार हठधर्मिता न दिखाती तो इतने किसान शहीद न होते
कृषि कानून वापस लिया जाना किसानों की बहुत बड़ी जीत है। कानून वापस लिए जाने से यह भी स्पष्ट हो गया है कि ये किसान हित में नहीं थे। लेकिन सरकार हठधर्मिता नहीं दिखाती तो इतनी बड़ी संख्या में किसान शहीद नहीं होते। किसानों की शहादत की जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री को अपने पद से त्याग पत्र दे देना चाहिए। - मुकेश सैनी, रालोद जिलाध्यक्ष।
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