कानूनों के खिलाफ और भाजपा के पक्ष में रहे गठवाला खाप चौधरी
गठवाला खाप चौधरी बाबा राजेंद्र सिंह मलिक कृषि कानूनों के खिलाफ रहे, लेकिन भाजपा के पक्ष में भी खड़े दिखाई दिए। हालांकि शुरुआत में उन्होंने आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। 26 जनवरी की घटना के बाद उन्होंने आंदोलन से किनारा कर लिया था। इसके बाद उन्होंने पांच सितंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की मुजफ्फरनगर में हुई महापंचायत में भी हिस्सा नहीं लिया था। जिसके बाद गठवाला खाप में भी विरोध के स्वर मुखर हो गए थे। बहावड़ी थांबेदार ने खाप के लोगों से एकजुट होकर मुजफ्फरनगर की महापंचायत में चलने का आह्वान किया था। गठवाला खाप की बदौलत महापंचायत में अच्छी-खासी भीड़ जुटी थी। इसके बाद में बाबा राजेंद्र सिंह मलिक ने 26 सितंबर को हिंद मजदूर किसान समिति के साथ महापंचायत की थी। लेकिन यह महापंचायत इतना असर नहीं छोड़ पाई थी।
किसानों की हुई जीत : बाबा राजेंद्र मलिक
कृषि बिलों की वापसी पर गठवाला खाप चौधरी बाबा राजेंद्र मलिक का कहना है कि यह किसानों की जीत है। जो लोग आंदोलन में शामिल थे, उन सभी की जीत है। अब सरकार को एमएसपी और महंगी बिजली की मांग पर भी विचार करना चाहिए।
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देर आए, दुरुस्त आए : बाबा श्याम सिंह
बहावड़ी थांबेदार बाबा श्याम सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री का फैसला स्वागत योग्य है। देर आए, दुरुस्त आए। लेकिन जब तक संसद में कानून वापसी नहीं होंगे, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसानों की बाकी मांगों पर भी सरकार को बात करनी होगी। कानून वापसी से भाजपा को चुनाव में कुछ फायदा जरूर पहुंचेगा।