शामली। तालाब रोड स्थित श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व में नौवें दिन 13 दीप विधान में प्रथम अभिषेक रमेश चंद्र, राहुल जैन ने और द्वितीय अभिषेक जैन ने किया। विधानाचार्य ने कहा कि आकिंचन हमें मोह का त्याग करना सिखाता है।
विधानाचार्य सतेंद्र जैन टीकमगढ़ ने विधि-विधान से सभी को पूजा-अर्चना कराई। उत्तम आकिंचन धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आकिंचन का अर्थ है अकेला होना, कुछ भी मेरा नहीं। आकिंचन की स्थिति बनती है बाह्य और अंतरंग सभी तरह के परिग्रह के पूर्ण त्याग से। क्रोध, मान, माया, लोभ, मिथ्यात्व, धन धान्य आदि परिग्रह का पूर्ण त्याग कर देने पर जब आत्मा अकेली रह जाती है, तब प्रकट होता आकिंचन धर्म। शांति धारा प्रेमचंद जैन, संजीव जैन, पंकज जैन, पारस जैन, राजीव जैन, राजीव जैन, सार्थक जैन, वाणिक जैन ने कराई। सौ धर्म इंद्र भूषण लाल जैन व अनीता जैन रहे। मौके पर अध्यक्ष सुदेश कुमार, मंत्री राजेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, संयोजक वीरेश जैन, पंकज जैन, भूषण लाल जैन, रीना जैन, रेखा जैन, इंदु जैन, आलोक जैन, प्रवीन जैन मौजूद रहे।
उधर, धर्मपुरा स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम आकिंचन धर्म की पूजा की गई। शांतिधारा पंडित मुन्ना लाल जैन व सचिन जैन परिवार और सुधीर जैन, आकाश जैन ने की। सिद्धचक्र महामंडल विधान में पंडित मुन्ना लाल जैन ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई। उन्होंने कहा कि आकिंचन हमें मोह का त्याग करना सिखाता है। जिनके हम बाहरी रूप में मालिक हो सकते हैं। जमीन, घर, चांदी, सोना, धन, अन्न आदि संसाधन इन सब का मोह न रखकर इच्छाओं पर काबू रख सकते हैं। इस अवसर पर संयोजक अनिल कुमार जैन ने बताया कि 19 सितंबर को सुबह 8.00 बजे से मंदिर प्रांगण में अनंत चतुर्दशी पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। भगवान वासु पूज्य का मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा और निर्वाण लड्डू चढ़ेगा। मौके पर अध्यक्ष संतोष जैन, संयोजक अनिल कुमार जैन, सचिव प्रवीण जैन चीकू, कोषाध्यक्ष राजेश कुमार जैन, सुशील जैन, अभिषेक जैन, गौरव जैन, अनुज जैन मौजूद रहे।
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परिग्रह को त्यागना ही आकिंचन धर्म
गढ़ीपुख्ता। श्री दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र में 10 लक्षण पर्व के नौवें दिन उत्तम आकिंचन धर्म की पूजा की गई। परिग्रह को त्यागना ही आकिंचन धर्म है। परिग्रह त्यागने वाला ही सिद्ध शीला को प्राप्त होता है। आत्मा आकिंचन है। प्रक्षाल शांति धारा के पश्चात विधि विधान से पूजन आरंभ हुआ। रतन त्रिया धर्म की पूजा की गई। 13 दीप महा मंडल विधान के अंतर्गत विद्युन्माली मेरु की पूजा शुरू हुई। शांति धारा नीरज जैन ने की। इस अवसर पर अनिल जैन, नीरज जैन, सुदेश जैन, दीपक राय जैन, रेणु जैन, ममता जैन, रेखा जैन, संगीता जैन आदि मौजूद रहे।
शामली श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर धर्मपुरा में पूजन करते जैन समाज के लोग- फोटो : SHAMLI
शामली के दिगंबर जैन मंदिर में पूजन करते जैन समाज के लोग- फोटो : SHAMLI