शाहजहांपुर। आजमगढ़-रामपुर के उपचुनाव में हार मिलने के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ही शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के एक प्रत्याशी ने सोशल मीडिया पर नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए पोस्ट की तो तमाम लोगों ने समर्थन करना शुरू कर दिया। पंचायत चुनाव से लेकर एमएलसी चुनाव तक पार्टी की नीतियों की विवेचना शुरू हो गई।
समाजवादी पार्टी की साल की शुरुआत में सबसे बड़ी हार जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में हुई थी। प्रत्याशी ने अचानक पाला बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद विधानसभा चुनाव में सभी छह सीटों पर पार्टी के प्रत्याशियों की बड़ी हार हुई थी। फिर एमएलसी चुनाव में भी पार्टी को भाजपा से हार का सामना करना पड़ा था। तब से ही सपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में असंतोष पनप रहा है। आजमगढ़ और रामपुर में हार के बाद रविवार को पार्टी में गहराता असंतोष फिर सतह पर आ गया।
एक पूर्व प्रत्याशी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखी कि ‘न तैयारी करेंगे, न किसी को जिम्मेदारी देंगे, न नेताओं को घर से निकालेंगे। फिर हार का ठीकरा ईवीएम और प्रशासन पर फोड़ेंगे। अपने कर्म नहीं देखेंगे बस। यह भी तो देखो जिससे लड़ रहे हैं उसकी तुलना में हमारी रणनीति, संगठन और तैयारी किस लेवल पर है।’ इसके अलावा भी उन्होंने कई पोस्ट कीं। हालांकि बाद में चर्चा बढ़ने पर सभी पोस्ट डिलीट कर दीं। एक अन्य पदाधिकारी ने लिखा कि ‘हमारे साहब’ एक के बाद एक पराजय के बावजूद उपचुनावों में स्वयं प्रचार करना खुद का अपमान समझते हैं।’ सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद तमाम लोगों ने कमेंट कर अपना असंतोष जाहिर किया।
सपा और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ बयानबाजी करने वालों की जानकारी शीर्ष नेतृत्व को दी जाएगी। इसका फैसला भी शीर्ष नेतृत्व करेगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष की मेहनत में कोई कमी नहीं थी। भाजपा ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करते हुए चुनाव जीता है। - तनवीर खां, जिलाध्यक्ष सपा