जलालाबाद। कोलाघाट पुल टूटने के कारण सात महीने से आवागमन की समस्या से जूझ रहे लाखों लोगों को 15 अगस्त तक राहत मिलने की उम्मीद है। सेतु निगम ने लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है। उम्मीद है कि एक महीने में शेष कार्य निपटा लिया जाएगा। पहले माना जा रहा था कि अक्तूबर में पुल का निर्माण कार्य पूरा होगा लेकिन अब इससे पहले यातायात शुरू होने की आस बंधने लगी है।
पिछले वर्ष 29 नवंबर को एक पिलर धंसने से क्षतिग्रस्त हुए कोलाघाट पुल से आवागमन ठप हो गया था। प्रदेश में भाजपा की सत्ता वापसी में जितिन प्रसाद को पीडब्ल्यूडी विभाग मिला और उन्होंने अपना पहला आधिकारिक दौरा इसी इलाके का किया था। उनके आने के बाद आवागमन की सहूलियत देने की दिशा में लोक निर्माण विभाग द्वारा पैंटून पुल और उसके एप्रोच रोड बनाने के प्रयासों से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली लेकिन दुश्वारियां कम नहीं हुईं। अब जनता को आवागमन की दिक्कतों से आजादी मिलने वाली है। लोनिवि मंत्री प्रसाद के प्रयास से पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का मई माह में शुरू हुआ पुनर्निर्माण कार्य केवल तीन माह में पूरा हो जाने की संभावना है। बरसात के मद्देनजर पुल के निचले हिस्से में होने वाला कार्य पूरा कर लिया गया है। सेतु निगम के अभियंताओं के अनुसार इससे बाढ़ की स्थिति में भी शेष बचा कार्य अनवरत जारी रह सकेगा।
पहले से ज्यादा मजबूत पाइल तकनीक से हुआ निर्माण
पहले पुल का निर्माण कुएं का आधार बनाकर (वेल फाउंडेशन तकनीक) किया गया था, लेकिन इस बार के निर्माण में आधुनिक पाइल फाउंडेशन तकनीक अपनाई गई है। इसके तहत पिलर खड़ा करने के स्थान पर ड्रिलिंग के जरिये लोहे के मजबूत जाल को जमीन के अंदर खड़ा करके इसमें कंक्रीट भर दी गई और उसकी सतह पर पिलर खड़ा किया गया है। इसके अलावा एक पिलर की जगह दो पिलर बनाए गए हैं और दो पिलर के बीच स्पेन में छह बीम डाले गए, जिनकी संख्या पहले चार थी।
बीम रखने का कार्य पूरा, केवल दो छतें बनाने का काम शेष
दो पिलर के बीच स्पेन में लगाने को छह बीम में से शेष बचे एक बीम को निर्धारित स्थान पर रखने का काम भी रविवार को पूरा कर लिया गया। इसके साथ ही पुल के निचले हिस्से में होने वाले कार्य लगभग पूरे कर लिए गए हैं। अब इन स्पेन के बीच पुल के ऊपरी हिस्से में तीन छतें डालने के काम बाकी है और उनमें से एक छत बनाने का काम जारी है। यह कार्य भी जून के अंत तक पूरा हो जाएगा और शेष दो छत जुलाई के अंत तक तैयार हो जाएंगी। बाद में अन्य छोटे कार्य पूरे करके 15 अगस्त तक पुल यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
धार्मिक आस्था का रखा ध्यान
करीब डेढ़ दशक पहले कोलाघाट पुल निर्माण के दौरान जिस पिलर को बनाने के समय काफी दिक्कतें आईं थी वही पिलर पिछले वर्ष अचानक धंसने से पुल का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। पिलर बनाने में आ रही दिक्कतों के समय कुछ लोगों की सलाह पर वहां हवन पूजन भी किया गया और जैसे तैसे इसका निर्माण पूरा हो सका। जलालाबाद की तरफ पुल की शुरुआत में एक पीपल का विशाल व काफी प्राचीन वृक्ष है। पुल निर्माण के दौरान कटरी के इस एरिया में उस पीपल के नीचे कुटी बनाकर रहने वाले बाबा शांतिदास ने कार्यदायी संस्था सेतु निगम के अधिकारियों से पीपल के चारों तरफ चबूतरा बनाने की बात कही थी। इसे वहां मौजूद अधिकारियों ने स्वीकार कर लिया लेकिन पुल बनाकर अधिकारी चले गए और चबूतरा नहीं बनाया। क्षतिग्रस्त पुल का निर्माण करने पहुंचे सेतु निगम के अभियंताओं ने पुल निर्माण की रूपरेखा तैयार करने के बाद सबसे पहले न केवल पीपल के चारों ओर चबूतरे का निर्माण कराया पास में ही मंदिर निर्माण कराने के लिए अलग से नींव भराई है। यह कार्य पुल का काम खत्म करके पूरा किया जाएगा।
पुल के निर्माण का लगभग 75 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा किया जा चुका है। मुख्य रूप से दो स्पेन के बीच डेक (छत) डालने का कार्य शेष बचा है। इसके लिए रात-दिन अनवरत रूप से निर्माण कार्य चल रहा है। उम्मीद है कि 15 अगस्त तक पुल निर्माण का कार्य पूरा कर उसे सामान्य यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। - नितिन वर्मा, अवर अभियंता, उप्र राज्य सेतु निर्माण निगम