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पहलवान पिता के अधूरे ख्वाब को साकार करने के सफर में खुशी

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पटना में खुशी चौधरी अपने पिता रामफल चौधरी के साथ - फोटो : SHAHJAHANPUR
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सूर्यकांत मिश्रा
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जैतीपुर। मूलरूप से हरियाणा के रहने वाले रामफल चौधरी कभी पहलवानी में दमखम दिखाया करते थे। जब खुद की पहलवानी छूटी तो बच्चों के जरिये ख्वाब पूरा करने की ठानी। बेटों ने पहलवानी (रेसलिंग) से इतर अन्य खेलों का रुख किया, लेकिन बेटी खुशी ने पिता के पदचिह्नों पर चलने का फैसला कर लिया। खुशी रेसलिंग में कई पदक जीतने के बाद अब ओलंपिक में पहुंचने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही हैं।
रामफल चौधरी हरियाणा के जिला जींद की तहसील सफींदो के गांव अशरफाबाद के रहने वाले हैं। रामफल का नाम कभी हरियाणा के अच्छे पहलवानों में गिना जाता था। 1988 में अपने गांव के सरपंच भी रहे। 1998 में उन्होंने जैतीपुर के अगरौली गांव में जमीन खरीदी और परिवार सहित यहीं बस गए। समय के साथ रामफल की पहलवानी छूटती गई, मगर राष्ट्रीय स्तर पर न खेल पाने की कसक हमेशा बनी रही। रामफल बताते हैं कि उन्होंने बच्चों को हमेशा खेलकूद के लिए प्रेरित किया। बेटों ने पहलवानी में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।
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सबसे बड़ा बेटा अमित चौधरी पुवायां के मारवाह मॉडर्न स्कूल में चौधरी क्रिकेट एकेडमी का संचालन कर रहा है। दूसरा बेटा गोविंद चौधरी राष्ट्रीय स्तर का मुक्केबाज हैं। वर्तमान में हरियाणा में अपोलो इंटरेनशनल स्कूल में बॉक्सिंग के गुर सिखा रहे हैं। उससे छोटे लव व कुश हरियाणा की एकेडमी में कबड्डी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। मगर सबसे छोटी बेटी खुशी चौधरी को कुश्ती भा गई। बचपन से ही वह पिता की निगरानी में कुश्ती की बारीकियां सीखने लगीं। 13 मई को खुशी ने नोएडा में आयोजित राज्यस्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता के अंडर-15 की 58 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है।
अब खुशी झारखंड में होने वाली राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में खेलती दिखेंगी। इससे पहले खुशी ने पटना में 25-26 मार्च को आयोजित ऑल इंडिया चैंपियनशिप और सात अप्रैल को आगरा में हुई राज्यस्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था। रामफल चौधरी को लगा कि गांव में बेटी की बेहतर ट्रेनिंग नहीं हो सकती तो उसे हरियाणा भेज दिया। फिलहाल वह हरियाणा के सोनीपत जिले के रठदना गांव में कोच राजेश सरोहा से कुश्ती के गुर सीख रही है। खुशी का अगला लक्ष्य ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना है। संवाद
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पिता ने पालीं चार भैंस, दूध पीकर बने खिलाड़ी
रामफल चौधरी ने बेटे और बेटियों को खेल में आगे बढ़ाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए चार भैंसें पालीं। रामफल बताते हैं कि अच्छा खिलाड़ी बनने के लिए बेहतर खानपान बहुत जरूरी है। रामफल कहते हैं कि कुश्ती उनकी पहली पसंद रही, मगर उन्होंने अपने किसी बच्चे पर उसे थोपा नहीं। बेटी खुशी कुश्ती में आगे बढ़ रही है, इससे उनका सीना फख्र से चौड़ा होता है। ओलंपिक में मेडल जीतेगी तो लगेगा कि उनके सारे सपने पूरे हो गए।
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