बैनर और नेताओं के कटआउट लेने के लिए युवाओं में लगी होड़
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प्रधानमंत्री की जनसभा के लिए पुत्तू लाल चौराहा से लेकर रोजा मंडी के आगे जगह-जगह रोड के दोनों ओर बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री ओर मुख्यमंत्री समेत अन्य नेताओं की छवियों वाले फ्लैक्सी बैनर बड़ी संख्या मे लगाए गए थे। यही नहीं, इसी क्षेत्र में रोड के दोनों ओर बिजली के खंभों के सहारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के आदमकद कटआउट भी लगाए गए थे।
यह सभी प्रचार सामग्री भारी पुलिस बल की निगरानी के कारण जनसभा होने तक सुरक्षित रही, लेकिन प्रधानमंत्री का भाषण खत्म होने के साथ सभास्थल से जैसे ही लोगों ने बाहर निकलना शुरू किया, उनमें नेताओं की तस्वीरों वाले बैनर और कटआउट हासिल करने की होड़ लग गई। सभास्थल से बाहर निकलने की जल्दबाजी में कई ब्लॉकों की रेलिंग और उनमें पड़ी कुर्सियां टूट गईं। गले में गेरुआ गमछा डाले युवाओं की टोलियां बैनरों और कटआउट की छीनाझपटी करती दिखीं। कई बैनर आकार में इतने बड़े थे कि अकेले उठा पानला मुमकिन नहीं था।
इस पर युवाओं ने बैनर फाड़कर उसके टुकड़े कर दिए और उनके लोहे के ढांचे तोड़कर अलग-अलग टुकड़ों में ले गए। इसी तरह कई युवा अपने कंधों पर मोदी, योगी के कटआउट ले जाते दिखे। नेताओं के कटआउट की उपयोगिता को लेकर सवाल करने पर एक युवक का कहना था कि इन्हें खेत में खड़ा कर देने पर रात में जानवर नहीं आएंगे और गेहूं की फसल सुरक्षित बनी रहेगी।
न टेनी दिखे न लखीमपुर खीरी का नाम आया
बेशक लखीमपुर खीरी पड़ोसी जनपद है। पड़ोसी जनपदों की भी सभा में बड़ी भागीदारी थी। भाजपाई दिग्गज भी आए थे, लेकिन लखीमपुर के सियासी दिग्गज और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री कहीं नजर नहीं आए। जबकि अधिकतर पड़ोसी जनपदों के विधायक, सांसद और मंत्रीगण प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में मौजूद थे। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी को भी लोगों की निगाहें तलाश रहीं थीं, लेकिन वह कहीं नहीं दिखाई दिए। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कुछ जनपदों का नाम लिया पर लखीमपुर खीरी का नाम उन्होंने नहीं लिया।