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आज बेखौफ होकर करें मतदान, प्रशासन ने सुरक्षा के किए भरपूर इंतजाम

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शाहजहांपुर के ओसीएफ रामलीला मैदान पर मतदान सामग्री का मिलान करते मतदान कर्मी । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। विधानसभा चुनाव में मनचाहा प्रत्याशी चुनने के लिए मतदान की वह घड़ी आ गई, जिसका बीते एक माह से इंतजार हो रहा था। सोमवार को सुबह सात बजे से जनपद के सभी छह विधानसभा क्षेत्र के बूथों पर मतदान शुरू हो जाएगा। निर्वाचन कर्मचारियों की टीमों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान भी भेजे गए हैं। इसलिए निष्पक्ष और निर्भीक होकर मतदान करें। रविवार को ओसीएफ के रामलीला मैदान से पोलिंग पार्टियों के साथ रवाना किए गए सुरक्षा बलों के जवानों को जिला निर्वाचन अधिकारी/डीएम उमेश प्रताप सिंह और एसपी एस आनंद ने यह हिदायत देकर भेजा कि मतदाताओं को बूथों पर ऐसा माहौल दें कि वह बिना किसी दबाव के मतदान कर सकें।
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जनपद में चुनाव के लिए 1791 मतदान केंद्र और 2633 बूथ बनाए गए हैं। चुनाव के लिए विभिन्न विभागों के करीब 12 हजार से अधिक कर्मचारी जुटाकर उन्हें मतदान कराने की जिम्मेदारी दी गई है। हर टीम में पीठासीन अधिकारी समेत मतदान अधिकारी प्रथम से चतुर्थ तक तैनात किए गए हैं। इन सभी कर्मचारियों को सुबह छह बजे ओसीएफ रामलीला मैदान के पूर्व की ओर खाली पड़े मैदान पर पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। इसलिए वहां विधानसभा क्षेत्रवार बनाए गए पंडालों में सुबह से मतदान कर्मचारी पहुंचने लगे। इन सभी को ईवीएम और वीवी पैट मशीनों के साथ स्टेशनरी, कोरोना बचाव किट आदि सामग्री का सुबह आठ बजे से वितरण शुरू हो सका क्योंकि भीड़ में कर्मचारियों को अपनी टीम के सदस्यों को तलाश करना कठिन हो गया।
सुविधा के लिहाज से विभिन्न सामग्री के वितरण को अलग-अलग काउंटर बनाए गए। एक काउंटर पर केवल ईवीएम और वीवीपैट का वितरण किया गया। दूसरे काउंटर से क्रिटिकल श्रेणी के 283 बूथों के लिए वीडियोग्राफर को वीडियो कैमरे जारी किए गए। इसी तरह अन्य काउंटरों से पोलिंग पार्टियों को बाकी सामग्री उपलब्ध कराई गई। ईवीएम मशीनें कर्मचारियों को इस निर्देश के साथ दी गईं कि उन्हें बूथ पर मतदान से ठीक पहले खोलना जाना है, लेकिन मैदान पर जगह-जगह समूह में बैठे निर्वाचन कर्मचारियों ने दी गई सामग्री का मिलान करते वक्त ईवीएम पैकिंग खोलकर उनकी भी जांच-परख कर ली।
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मतदान कराने की जिम्मेदारी को लेकर कर्मचारियों में काफी उत्साह देखा गया। हालांकि, चुनाव ड्यूटी में लगाए गए दिव्यांग कर्मचारियों समेत उन महिला कर्मचारियों के चेहरों पर परेशनी की लकीरें खिंची दिखी, जिन्हें गोद में बच्चों को भी साथ लेकर ड्यूटी पर जाना पड़ा। दोपहर तक ओसीएफ के दोनों मैदानों पर कर्मचारियों की भारी भीड़ और वाहनों के जमावड़े से वहां मेले जैसा माहौल बन गया। प्रभारी अधिकारी (निर्वाचन कार्मिक)/मुख्य विकास अधिकारी श्याम बहादुर सिंह, जिला विकास अधिकारी पवन कुमार सिंह, डीआरडी के परियोजना निदेशक अवधेश राम, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक आदि अधिकारियों ने भीड़ बढ़ती देख स्वयं पंडालों में भ्रमण कर व्यवस्था दुरुस्त कराई।
अधिकारियों ने कई बार पोलिंग पार्टियों के क्रमांक लाउडस्पीकर पर घोषित कराकर उन्हें उनके वाहनों के नंबर बताए ताकि वह अपने वाहन में बैठें और मैदान में भीड़ कम हो। इसके बावजूद कई दिव्यांग और बच्चों को साथ लेकर आईं महिला कर्मचारियों ने ड्यूटी कटवाने को वहां के निर्वाचन कैंप कार्यालय के आसपास मंडराना शुरू कर दिया। इस पर सीडीओ को लाउडस्पीकर से उद्घोषणा करनी पड़ी कि केवल गर्भवती महिला कर्मचारियों और अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित क्रिटिकल श्रेेेणी के कर्मचारियों की ड्यूटी काटी गई है। पोलिंग पार्टियों की रवानगी का क्रम दोपहर तीन बजे के बाद तक जारी रहा। प्रशासन ने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि दूर के बूथों की पोलिंग पार्टियां पहले रवाना की जाएं।
मैदान पर हुए जलभराव में फंसे वाहन
शाहजहांपुर। जिन वाहनों (ट्रकों) से मतदान कर्मचारियों की टीमों को बूथों पर रवाना होना था, उन्हें शनिवार शाम से ओसीएफ के मेला मैदान पर खड़ा कराकर प्रशासन ने अपनी निगरानी में ले लिया था। इसी तरह सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टैटिक मजिस्ट्रेट श्रेणी के भ्रमणशील रहने वाले अधिकारियों के छोटे वाहन भी परिवहन विभाग ने अपने अधीन कर लिए थे। सुबह से निर्वाचन ड्यूटी वाले वाहन ओसीएफ मैदान से रवाना होने शुरू हुए तो हाल में हुई बारिश के कारण मैदान में भरा पानी उनकी राह में रोड़ा बन गया। हालांकि, जलभराव की समस्या दूर करने के लिए वहां मिट्टी डलवाई गई, लेकिन इससे दलदल बन गया। अधिकारियों के छोटे वाहन उसमें होकर निकल गए, लेकिन जगह-जगह कई ट्रकों के पहिये दलदल में फंस गए। इस वजह से पीछे के अन्य वाहनों को भी वहां से निकलने में कठिनाई हुई। संवाद
नेटवर्क फेल होने से बिछड़ गईं पोलिंग पार्टियां
शाहजहांपुर। मतदान कर्मचारियों की रवानगी शुरू होने के साथ बीएसएनएल समेत निजी क्षेत्र की अन्य संचार कंपनियों के मोबाइल नेटवर्क फेल होने से पोलिंग पार्टियों के सदस्य आपस में संपर्क नहीं हो पाने से भीड़ में एक-दूसरे से बिछड़ गए। इस कारण वहां लगे साउंड सिस्टम से उनके नाम बार-बार पुकारकर उन्हें उनके वाहनों तक भेजा गया। सुबह से शाम तक मोबाइल नेटवर्क बार-बार फेल होने से न सिर्फ कर्मचारियों बल्कि व्यवस्था संभालने में जुटे अधिकारियों को भी काफी असुविधा हुई।
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