शाहजहांपुर। अभिव्यक्ति नाटक मंच की ओर से मच्छिंद्र मोरे द्वारा लिखित नाटक ‘जानेमन’ का मंचन बुधवार को गांधी भवन प्रेक्षागृह में किया गया। नाटक का उद्घाटन सिने अभिनेता राजपाल यादव में मंच पर नारियल फोड़कर किया। नाटक में कलाकारों ने भावपूर्ण मंचन से किन्नरों की पीड़ा को प्रदर्शित किया, जिसको काफी सराहा गया।
शाम 7:30 बजे शमीम आजाद के निर्देशन में अभिव्यक्ति के कलाकारों ने नाटक का मंचन शुरू किया। नाटक में दिखाया कि किन्नर कोई प्राकृतिक रचना नहीं है, बल्कि गुरु की वंशवेल के रूप में मर्द से किन्नर बनाया भी जाता है। मान्यता है कि किन्नर गुरु अपनी एक चेलन के रूप में अपनी निशानी के रूप में छोड़कर नरक से मुक्ति पाती है। नाटक के माध्यम से बताया गया कि वह मर्द हुआ किन्नर बनने को आतुर हुआ करते हैं, जिनका बचपन में शोषण होने के कारण उनमें पुरुष के संसर्ग की चाह जाग उठती है।
वह स्त्री बनने की इच्छा जाहिर करते हुए पुरुष अंग को हथियार से बिच्छेदनकर बहुचर माता का वरदान मान के किन्नर जीवन की शुरुआत करते हैं। नाटक के एक दृश्य में दिखा गया कि किन्नर अपने समुदाय की देवी बहुचर माता के समक्ष कहता है कि किन्नर ईश्वर के घर पैदा नहीं होते, उन्हें तू बनाती है किन्नर, ताकि तेरी पूजा होती रहे। इस तरह नाटक जानेमन समाज के उन अवांछित तत्वों पर प्रकाश डालता है, जिसमें बच्चों के शोषण करने वाले स्वयंभू हैं या किसी किन्नर को नरक से मुक्ति के समाधान में एक मर्द को जबरन अथवा स्वयं उसी की इच्छा से किन्नर बना दे।
नाटक में नज्जो के रूप में कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, पन्ना के राजेश भारती और बसंती के किरदार में ऋषिकांत ऋषि ने अपनी छाप छोड़ी। साथ ही अभिषेक कुमार, अनुराग राठौर, अरुण गुप्ता, अरुण कुमार, रिजवान सिद्दीकी, सूरज मिश्रा, अंकित त्रिवेदी, अमन राजवंशी, परविंदर सिंह, पुनीत शुक्ला, अंकुर चौहान, विनोद दौलताबाद, प्रताप राठौर, ओमवीर, अमित राठौर ने भी किरदारों को जीवंत किया। इस मौके पर एआरटीओ प्रशासन महेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. स्मृति वर्मा, कृभको के एमडी की पत्नी नीतू चोपड़ा, कस्टम कमिश्नर केके कठेरिया, समाजसेवी ललित गर्ग, ओसीएफ महाप्रबंधक अनूप शुक्ला, डॉ. इंदु अजनबी आदि मौजूद रहे।