पुवायां (शाहजहांपुर)। एक कहावत है कि पढ़े पढ़ाई झोकत भार, जै देखो कर्ता के कार। पुवायां क्षेत्र में भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद युवाओं की यही दशा है। रोजगार के साधन न होने के कारण उन्हें प्राइवेट स्कूलों में काफी कम वेतन पर नौकरी करनी पड़ रही है। वहीं, कुछ लोग बड़े शहरों में मजदूरी करके परिवार चला रहे हैं।
प्रदेश भर में खेती के मामले में अलग पहचान रखने वाला पुवायां क्षेत्र विकास के मामले में कोसों पीछे हैं। क्षेत्र में सुखबीर एग्रो एनर्जी लिमिटेड को छोड़कर एक भी ऐसा कारखाना नहीं है, जहां पढ़े लिखे लोगों को रोजगार मिल सके। अभिभावक अपना पेट काटकर बच्चों को इस आशा में उच्च शिक्षा दिलाते हैं कि बुढ़ापे में उन्हें सहारा मिलेगा, लेकिन होता इसके उलट है। बुढ़ापे में उन्हें अपने लिए रोटी तो जुटानी ही पड़ती है, बच्चों को नौकरी के लिए फार्म आदि भरवाने की व्यवस्था भी करनी पड़ती है।
मिनी पंजाब के नाम से मशहूर पुवायां तहसील में राइस मिलों के अलावा किसान सीकारी चीनी मिल और बंडा के मकसूदापुर में बजाज की चीनी मिल है। इसके अलावा गांव इनायतपुर में सुखबीर एग्रो एनर्जी लिमिटेड के नाम से बड़ा राइस मिल है। सिंधौली, पुवायां, बंडा और खुटार चार ब्लाक क्षेत्रों वाली पुवायां तहसील में इसके अलावा कारखानों के नाम पर कुछ नहीं है। इस कारण उच्च शिक्षित बेरोजगार दूसरे प्रदेशों को पलायन कर नौकरी कर परिवार की गुजर करने को विवश हैं।
यहां ये कारखाने लगाए जा सकते हैं
- कृषि बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण चीनी मिलें।
- बड़े पैमाने पर आलू की खेती को देखते हुए इससे तैयार होने वाली खाद्य सामग्री के कारखाने।
- कपास की पैदावार भी खूब शुरू हो गई है कपड़ा मिले आदि।
- गो सदन में पल रही तमाम गायें, गौ मूत्र और उससे तैयार होने वाली औषधियों का दवा व्यवसाय।
- कृषि यंत्रों के कारखाने, खाद, पेस्टीसाइड्स आदि के कारखाने।
ये होंगे उद्योगपतियों को लाभ
- कारखाना स्वामियों को काफी सस्ता श्रम और भरपूर मात्रा में श्रमिक।
- श्रमिकों की बड़ी संख्या से मैन पावर की दिक्कत नहीं।
- माल बाहर भेजने के लिए सीधे आसाम तक और दिल्ली, बरेली, लखनऊ तक बढ़िया और चौड़े मार्ग।
- कच्चे माल की बहुतायत जिससे लागत कम रहेगी।
- कारखाने लगाने के लिए जमीन भी सस्ते भाव पर उपलब्ध।
क्षेत्र के लोगों को यह होगा लाभ
- शिक्षित बेरोजगारों और श्रमिकों का पलायन रुकेगा।
- घर में ही रोजगार से अधिक बचत होगी।
- शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
- व्यापारियों, किसानों को भी फायदा पहुंचेगा।
पुवायां क्षेत्र की नेताओं ने काफी उपेक्षा की, जिस कारण यह क्षेत्र खेती को छोड़कर रोजगार देने के मामलों में काफी पिछड़ा है। यहां कारखाने लगाए जाते को युवाओं को अपने घर के पास रोजगार मिल जाता, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। बेरोजगार हताश और परेशान है।
- गोपाल त्रिवेदी, जुझारपुर पुवायां
पुवायां क्षेत्र के बेरोजगार रोजी रोटी के लिए मुंबई, अहमदाबाद, देहरादून, हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर आदि स्थानों पर जाकर नौकरी करते हैं। नेताओं के साथ ही सरकार को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- सुधीर त्रिवेदी, अधिवक्ता खुटार