शाहजहांपुर। अगर आप हर समय मोबाइल देखते रहते हैं। थोड़ी देर तक मोबाइल न देखने से बेचैनी होने लगती है। या फिर बेवजह मोबाइल स्क्रीन स्क्रॉल करते रहते हैं। टॉयलेट में भी मोबाइल ले जाते हैं, तो सचेत हो जाने की जरूरत है। ये सब मोबाइल एडिक्शन के लक्षण हैं।
इससे आंखों के कमजोर होने के साथ ही चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, बेचैनी, स्मरणशक्ति कमजोर होना आदि लक्षण सामने आने लगते हैं। मोबाइल की लत लगने पर काउंसिलिंग कराना बेहतर विकल्प हो सकता है। इनसे बचाव के लिए विशेषज्ञ केवल जरूरत पर ही मोबाइल के प्रयोग की सलाह देते हैं।
तन और मन के लिए घातक है मोबाइल
2017 में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 194 देशों की सहमति से यह कदम उठाया था। इसके अंतर्गत तकनीक संबंधित समस्याओं को इस कैटेगरी में रखा है और मोबाइल गेम एडिक्शन भी इसी के अंतर्गत आता है। इसे गेमिंग डिसऑर्डर एडिक्शन भी कहते हैं। मोबाइल को लगातार इस्तेमाल करना और इस पर आपका नियंत्रण नहीं रहना। इससे दैनिक जीवन के कामकाजों पर प्रभाव पड़ता है। इसे आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव को मोबाइल एडिक्शन कहा जाता है।
ऐसे लगती है मोबाइल देखने की लत
किसी भी चीज की लत ऐसे ही नहीं लगती। उसके पीछे का प्रमुख कारण हैं, किसी भी चीज की अधिकता। जब हम किसी चीज का अत्यधिक इस्तेमाल करते हैं तो हमें उसकी लत लग जाती है। मोबाइल की लत लगने के निम्न कारण हैं-
- इंटरनेट का इस्तेमाल
- मोबाइल एप
- सोशल मीडिया
- वर्चुअल दुनिया से जुड़ाव
- मोबाइल गेम
- मोबाइल से पैसे कमाना
प्रमुख दिक्कतें
- मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली लाइट से आंखों में समस्या
- चिड़चिड़ापन और व्यवहार में बदलाव
- मानसिकता पर प्रभाव पड़ता है
- नींद न आना
ऐसे पाएं मोबाइल एडिक्शन से छुटकारा
- इंटरनेट से अपना जुड़ाव कम करें। बिना इंटरनेट के मोबाइल एडिक्शन से छुटकारा पाना बहुत आसान हो जाता हैं। फिर हम मोबाइल को केवल अपने काम के लिए ही इस्तेमाल करते है।
- शुरुआती दिनों में ऐसा करना संभव नहीं है। शुरुआत में कम इंटरनेट पैक वाला रिचार्ज करें।
- इंटरनेट के साथ-साथ वर्चुअल दुनिया से अपना जुड़ाव कम करें। असल दुनिया में लोगों के साथ समय बिताएं।
- मोबाइल एडिक्शन का सबसे बड़ा एक कारण सोशल मीडिया भी है। इसके कारण हम बार-बार यह चेक करते है कि सोशल मीडिया पर क्या चल रहा हैं। इसलिए इससे भी दूरी बनाएं।
- मोबाइल नोटिफिकेशन को बंद रखें। मोबाइल पर नोटिफिकेशन की घंटी बजने के बाद हमारा ध्यान बार-बार उसकी तरफ जाता है।
- मोबाइल से दरी बनाने और ख़ाली समय मिलते ही मोबाइल का इस्तेमाल करना शुरू न करें। इसकी बजाय अपना समय दूसरी चीजों में लगाएं।
- बार-बार मोबाइल चेक करने की बजाय अपना समय निश्चित करें कि आप कब और कितना मोबाइल इस्तेमाल करेंगे।
बेवजह मोबाइल का प्रयोग करना बीमारी को जन्म देता है। लोग इसे हल्के में लेने की भूल न करें। शुरुआती समस्याएं भयंकर मानसिक रोगी बना सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि जरूरत पड़ने पर ही मोबाइल का इस्तेमाल करें। बार-बार मोबाइल देखने की आदत लग रही है तो मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग जरूर कराएं।
- डॉ. रोहिताश ईशा, क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक, राजकीय मेडिकल कॉलेज, शाहजहांपुर।