खुटार (शाहजहांपुर)। वन विभाग के आला अधिकारी जंगल में पेड़ों का कटान बंद होने के कितने भी दावे करें, लेकिन धरातल पर यह दावे हवाई साबित हो रहे हैं। खुटार रेंज के छापाबोझी बीट में सोमवार दोपहर कोरों के दो कीमती पेड़ काट डाले गए। खास बात यह रही कि सूचना के बाद भी किसी वनकर्मी ने कार्रवाई करना तो दूर मौके पर पहुंचकर लकड़ी को कब्जे में लेने तक की जरूरत नहीं समझी।
गौरतलब है कि अमर उजाला ने पांच मार्च के अंक में फत्तेपुर जंगल में हो रहे कीमती पेड़ो के कटान को लेकर प्रमुखता से खबर छापी थी। डीएफओ आदर्श कुमार ने कटान पर कड़ाई से अंकुश लगाने के निर्देश वनकर्मियों को दिए थे। इसके बाद छह मार्च को खुटार के रेंजर डीएस यादव ने फत्तेपुर जंगल का मुआयना किया था और वनकर्मियों को कड़ी फटकार लगाते हुए दोषी वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
अधिकारियों के कड़े निर्देशों का वनकर्मियों के ऊपर कोई असर होता नहीं दिख रहा है। सोमवार दोपहर माफिया ने छापाबोझी बीट में कोरो के दो कीमती पेड़ काट डाले। एक पेड़ काटने के बाद जमीन पर न गिरकर दूसरे पेड़ से फंस गया तो लकड़ी काटने वालों से दूसरे पेड़ को काट डाला। खास बात रही कि रेंज कार्यालय को सूचना देने के कई घंटे बाद तक कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे वनकर्मियों की मिलीभगत से कटान होने की बात कही जा रही है।
शुरू किया गया जड़ों को मिट्टी में दबाने का काम
खुटार। कटान की खबरें प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों ने वनकर्मियों को फटकार लगाई तो वनकर्मियों ने जंगल के अंदर कटे हुए पेड़ों की जड़ों पर मिट्टी डालकर ढकने का काम शुरू कर दिया है। जिससे अगर कोई अधिकारी जंगल का मुआयना करे तो उन्हें कटे हुए पेड़ों के बारे में कोई सबूत न मिल सके। इस काम के लिए कुछ वाचर और कई श्रमिक लगाए गए हैं।
फत्तेपुर से दिन की जगह रात में निकली साइकिलें
खुटार। खुटार बीट के फत्तेपुर जंगल में रेंजर की ओर से मुआयना करने के बाद वनकर्मियों और लकड़ी काटने वालों ने अपना तरीका बदल दिया है। पहले दिन में भी साइकिलों पर जंगल से लकड़ी ले जाते हुए लोग देखे जा सकते थे, लेकिन अब सिर्फ रात में ही साइकिलों से लकड़ी के गुटके ले जाने का काम किया जा रहा है।
होटल, ढाबों और ईंट भट्ठों पर भी होती है सप्लाई
खुटार। जंगल में कटान करने के लिए कई तरीके अपनाये जा रहे हैं। पेड़ काटने के बाद कुछ बोटों से काम वाली लकड़ी अलग कर ली जाती है और बाकी लकड़ी के छोटे-छोटे गुटके बनाए जाते हैं। इसके बाद साइकिलों में भरकर इन्हें होटलों, ढाबों और ईंट भट्ठों पर सप्लाई किया जाता है। इस पूरे खेल के बारे में वन विभाग को पूरी जानकारी है, लेकिन जिम्मेदार जान बूझकर अंजान बने बैठे हैं।
प्रकरण संज्ञान में आया है। टीम को मौके पर भेजा गया है। अगर कटान किया गया है तो आरोपियों को पकड़कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पेड़ कटान किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आदर्श कुमार, डीएफओ, शाहजहांपुर