शाहजहांपुर। सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक हुई झमाझम बरसात ने किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। 115 मिमी बारिश ने अक्टूबर माह में बारिश का एक दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। खेतों से लेकर मंडियों तक धान की अधिकांश फसल लगातार दूसरे दिन भी भीगने और खेतों में पलटने से खराब हो गई है। मौसम विशेषज्ञों ने अगले 24 घंटे तक बारिश और बूंदाबांदी जारी रहने का अनुमान जताया है।
तेज हवा चलने से खेतों में खड़ी धान और गन्ना की फसल गिर गई थी। सोमवार सुबह कुछ देर को बारिश थमी, लेकिन अपराह्न तीन बजे से शुरू हुई बारिश ने दिन ढले तक थमने का नाम नही लिया। रात दस बजे के बाद शुरू हुई तेज बारिश सुबह आठ बजे तक जारी रही। जनपद में 1.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान बोया गया है, लेकिन अधिकारी भी मानते हैं कि अभी मुश्किल से 15 से 20 फीसदी फसल कट सकी है।
वे किसान खासे परेशान हैं, जिन्होंने फसल काट ली है, लेकिन उसे उठाकर घर-खलिहान नहीं ले जा सके। धान के कटे हुए ढेर खेतों में भरे पानी से डूबने के कारण अब उसके सड़ने और अंकुरित होने का खतरा है। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह ने बताया कि अक्टूबर माह में बीते दस वर्ष की तुलना में इस बार बारिश ज्यादा हुई।
जबकि माह खत्म होने में अभी 10 दिन शेष हैं। इससे पहले वर्ष 2009 में इसी माह 260 मिमी वर्षा का रिकॉर्ड बन चुका है। बताया कि मंगलवार सुबह वायुदाब में थोड़ी वृद्धि हुई है, लेकिन हवा की गति धीमी होने बादल छाए रहेंगे और अगले 24 घंटे तक मौसम सामान्य होने के आसार नही हैं।
गत वर्षों में अक्तूबर माह में हुई बारिश (मिमी में)
वर्ष बारिश
2009 260
2010 शून्य
2011 शून्य
2012 2.0
2013 27.0
2014 31.0
2015 10.4
2016 28.4
2017 शून्य
2018 शून्य
2019 शून्य
2020 शून्य
2021 130 (अब तक)
खेतों से पानी निकाल कर हाथ से काटें गिरा धान
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ शश्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी और जिला कृषि रक्षा अधिकारी शिवशंकर गौतम का कहना है कि अतिवृष्टि पर नियंत्रण संभव नहीं है, लेकिन उससे होने वाले नुकसान से बचने के लिए किसान फसल सुरक्षा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें। बताया कि खेतों से जल निकासी के तत्काल उपाय करने के साथ ही फसलों की निरंतर निगरानी करते रहें। जो धान गिर चुका है।
उसकी हाथों से तुरंत कटाई कर लें और शेष धान को अभी काटने में जल्दबाजी न करें। जब तक कि उसमें थोड़ी हवा और धूप नहीं लग जाए। फसल में धूप लगने तक उसकी मशीन से कटाई के प्रयास कारगर नहीं होंगे। परिपक्व हुए धान पर कार्बेंडा जोन फफूंदनाशी रसायन कम कारगर होगा, इसलिए भीगा धान काला पड़ने से बचाने के लिए उसे सुखाना जरूरी होगा।
क्षतिपूर्ति के आकलन को टीमें गठित
मुख्य सचिव स्तर से मंगलवार सुबह प्राप्त हुए आदेश के अनुपालन में डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने ग्राम पंचायत स्तर पर टीमें गठित कर दी हैं। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक ने बताया कि इन टीमों में शामिल लेखपाल, पंचायत सचिव, बीमा कंपनी और कृषि विभाग के कर्मचारी फसल बीमा वाले किसानों समेत उन किसानों को भी चिह्नित करेंगे, जिनकी फसलें बारिश से खराब हुईं हैं। बाद में गैर बीमित किसानों को शासन से निर्धारित क्षतिपूर्ति की धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
आलू को बचाने का प्रयास शुरू
पुवायां। बारिश से आलू की बोई गई फसल में नुकसान से बचने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। पानी जमीन में सोखने के लिए जेसीबी से गड्ढे खुदाई का काम शुरू किया है। गहरे गड्ढे खोद कर उनको सोख्ता का रूप दिया जा रहा है। सोख्ता में पानी जमीन के अंदर चला जाएगा।
बारिश से खेतों में सूख रहा धान डूबा
बंडा। खेत में सूख रहा किसानों का धान बारिश में भीगने से खराब होने की आशंका हो गई है। तमाम किसानों का धान कट चुका है, लेकिन नमी के कारण धान को खेत में सुखाया जा रहा है। बारिश होने से फसल खेत में ही भीग गई है। गांव धर्मापुर निवासी वासुदेव ने बताया कि उन्होंने छह दिन पहले धान कटवाया था। धान को खेतों में सुखाया जा रहा था, लेकिन बारिश से धान पानी में डूब गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व गिरजेश चौधरी ने बताया कि बेमौसम बारिश से किसानों का काफी नुकसान हुआ है। किसान खेत से धान निकालकर कहीं सूखी जगह डलवाएं। टोकन से सभी का धान तौला जाएगा। संवाद
किसानों ने की नदी की सफाई
गांव फुगनिहाई घाट से होकर पीलीभीत के थाना बिलसंडा के गांव शीतलपुर मरौरी के पास खन्नौत नदी के पुल में कूड़ा-करकट फंसने से पानी का बहाव रुक गया। इससे किसानों की धान की फसल पानी में डूब गई। नदी में पीछे से पानी और तेजी आ रहा हैं। पीलीभीत जिले में गांव शीतलपुर मरौरी और शाहजहांपुर जिले में गांव फगुनिहाई के किसान एकत्र हुए और नदी के पुल के नीचे सफाई की।
कच्चा रास्ता कट कर बहा
गांव भांभी से जनपद पीलीभीत के थाना बिलसंडा के गांव शीतलपुर जाने वाला कच्चा रास्ता बारिश के कारण गांव फुगनिहाई के पास कट गया और मिट्टी बारिश में बह गई। इससे आवागमन ठप हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि अब रास्ता सही होने के बाद ही आवागमन सुचारु हो सकेगा। तब तक लोगों को दूसरे रास्तों से काफी लंबा रास्ता काट कर जाना पड़ेगा।