शाहजहांपुर में भगवान श्रीगणेश की मूर्ति का श्रृंगार करते लोग । संवाद
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शाहजहांपुर। श्री गणेशोत्सव का शुक्रवार से शुभारंभ होने जा रहा है। अगले दस दिनों तक चलने वाले इन उत्सव को लेकर बृहस्पतिवार केे तैयारियां पूरी कर ली गईं। श्रद्धालु गणपति बप्पा की प्रतिमाएं घर लेकर हैं, जिनकी स्थापना की जाएगी।
शुभ मुहूर्त में घरों में एकदंत विराजेंगे। 19 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर पर्व का समापन हो जाएगा। शहर में भी बप्पा के उत्सव को लेकर खासा उत्साह है। खिरनीबाग स्थित लाला रामचरन दास धर्मशाला में पंडाल को सजाया है। लोग घरों में भगवान गणेश की स्थापना के लिए तैयारी कर लिए हैं। गाजे-बाजे के साथ भक्तिधुन पर थिरकते भक्त ‘गणपति बप्पा मोरिया...’ का जयघोष लगाकर जुलूस के रूप में गणेश प्रतिमाओं को स्थापना के लिए पांडाल तक ले जाएंगे। साथ ही कई श्रद्धालु बृहस्पतिवार को बाजार से गणेश प्रतिमाएं खरीदकर अपने घरों में विराजित करने ले गए।
गणेश चतुर्थी व्रत पूजन विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद तांबे या फिर मिट्टी की गणेश जी की प्रतिमा लें। फिर एक कलश में जल भरें और उसके मुख को नए वस्त्र से बांध दें। फिर इस पर गणेश जी की स्थापना करें। गणेश भगवान को सिंदूर, दूर्वा, घी और 21 मोदक चढ़ाएं और उनकी विधि-विधान पूजा करें। गणेश जी की आरती उतारें और प्रसाद सभी में बांट दें। दस दिन तक चलने वाले इस त्योहार में गणेशजी की मूर्ति को एक, तीन, सात और नौ दिनों के लिए घर पर रख सकते हैं। ध्यान रहे कि गणेशजी की पूजा में तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। गणेश पूजन में गणेश जी की परिक्रमा करने का विधान है।
गणेश चतुर्थी पर शुभ मुहूर्त
दुर्गा माता मंदिर के पुजारी अरुण शुक्ला ने बताया कि सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक राहू काल रहेगा। भाद्र 1:13 बजे से लग जाएंगी, जो रात को 12:12 बजे तक रहे। पाताल वासिनी भाद्रा है। यह बहुत महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन विचारणीय है। इसलिए गणेश चतुर्थी का पूजन सुबह 10:30 बजे से पहले करना ज्यादा श्रेष्ठ रहेगा। दोपहर को 12:00 बजे से 01:13 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। यह सबसे उत्तम समय है।