नोडल अधिकारी को गोशालाओं में नहीं दिखी कोई कमी
शाहजहांपुर। नोडल अधिकारी व पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. एके गर्ग ने रविवार को यहां पहुंचने के बाद गौशालाओं निरीक्षण किया। गांवों के संपर्क मार्गों पर बारिश का पानी भरा होने से उन्हें गोशाला तक पहुंचने में काफी दिक्कत हुई।
जिले में कुल 50 गौशालाएं हैं। सभी गौशालाओं में औसतन 150 से 200 पशु हैं। शहर की कुछ गौशालाओं में 200 की क्षमता के विपरीत पशुओं की संख्या 250 से 300 तक है। इनमें से आधा दर्जन गौशालाएं संसाधनों की कमी के कारण बंद करके वहां के पशु अन्य गौशालाओं में भेजे गए हैं। इस तरह जनपद में सक्रिय गौशालाएं 44 हैं। संसाधनों के लिहाज से शहरी क्षेत्र में पुवायां रोड पर सिंचाई विभाग के डाकबंगला परिसर में संचालित नंदीशाला, मघईटोला की गौशाला, विनोबा सेवा आश्रम से संचालित गौशालाओं की व्यवस्थाएं बीते वर्ष तब सुधरीं, जब देखरेख के अभाव में पशुओं की मौतें होने पर प्रशासन ने ध्यान दिया।
नगरीय क्षेत्रों में नगर निकायों से संचालित अन्य गौशालाओं की दशा भी कमोबेश ठीक है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की गौशालाओं में पशुओं की देखरेख में कमी को लेकर वह ग्रामीण लगातार सवाल उठा रहे हैं, जो आवारा पशुओं के खेतों में घुसकर फसलें चर लेने से परेशान हैं। इन्हीं गौशालाओं की व्यवस्था जांचने के लिए शासन के निर्देश पर जनपद के नोडल अधिकारी डॉ. गर्ग आज यहां पहुंचे। हालोकि, उन्होंने निगोही पशु अस्पताल के फार्मेसिस्ट प्रवीण सक्सेना के साथ रटा गांव में गौशाला का निरीक्षण करने पर कोई खामी नहीं पाई। पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में भूसा-चोकर उपलब्ध पाया और पशुओं के स्वास्थ्य का नियमित परीक्षण करने के निर्देश दिए। बाद मेें चकबरैंचा गांव की गौशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें रास्ते में जलभराव का सामना करना पड़ा। फिलहाल, नोडल अधिकारी जनपद प्रवास पर रहकर अगले एक-दो दिन तक गौशालाओं का निरीक्षण जारी रखेंगे।
जो गौशाएं क्रियाशील हैं, उनमें कोई कमी नहीं है क्योंकि जहां संसाधनों की कमी थी, वहां की गौशालाएं पहले ही बंद की जा चुकी हैं। प्रत्येक गौशाला को भेजे गए पशुओं का समय-समय पर सत्यापन भी कराया जाता है। इसके बावजूद नोडल अधिकारी के निरीक्षण के दौरान वहां कोई कमी पाई जाती है तो उसका संज्ञान लेकर व्यवस्थाएं ठीक कराई जाएंगी।
-डॉ. आरबी सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी