फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाल मजदूरी की आशंका पर ट्रेन से उतारे 18 नाबालिग

विज्ञापन
शाहजहांपुर में ट्रेन से उतारे गए नाबालिगों को ले जाने के आरोपी। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
विज्ञापन
शाहजहांपुर। बाल मजदूरी कराने के लिए ले जाने की आशंका पर चाइल्ड लाइन, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम और जीआरपी पुलिस ने अवध-आसाम एक्सप्रेस के दो कोचों से 18 नाबालिगों को शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पर उतार लिया। इनकी उम्र 11 से 17 साल के बीच है। उन्हें ले जाने वाले वयस्कों को भी उतारा गया। बच्चों को चाइल्ड लाइन की सुपुर्दगी में दे दिया है। बच्चों की काउंसिलिंग की जा रही है।
विज्ञापन

चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना मिली थी कि अवध-आसाम एक्सप्रेस के एस-1 और डी-2 कोच में कुछ लोग बाल मजदूरी के लिए नाबालिगों को साथ लेकर जा रहे हैं। सूचना के आधार पर चाइल्ड लाइन की टीम शाहजहांपुर रेलवे स्टेेशन पहुंच गई। यहां पर जीआरपी प्रभारी फजल उर्रहमान खां को बाल मजदूरों को ले जाए जाने की सूचना से अवगत कराया। बृहस्पतिवार सुबह 09:05 बजे शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही चाइल्ड लाइन की टीम ने जीआरपी के साथ मिलकर ट्रेन के दोनों कोच में बैठे 17 नाबालिगों और उनको ले जाने वाले दस वयस्कों को उतार लिया। एक नाबालिग को बाद में ट्रेन से शहबाजनगर के पास उतारा गया।
लोगों का कहना था कि ये बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले हैं और मेहनत मजदूरी के लिए अलग-अलग स्थानों पर जा रहे हैं। वहीं पर अपने बच्चों को मदरसों में पढ़ने के लिए भेजेंगे। नाबालिगों का भी यही कहना था कि वे अपने पिता, भाई, चाचा और मामा के साथ जा रहे हैं। वहां जाकर मदरसे में पढ़ाई करेंगे। कुछ लोग अन्य जगहों के हैं। हालांकि अभी यह जांच का विषय है कि बच्चों को बाल मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था, या फिर वे अपने अभिभावकों के साथ थे।
विज्ञापन

बचपन बचाओ आंदोलन के स्टेट कोआर्डिनेटर सूर्यप्रताप मिश्रा ने बताया कि बच्चों को बाल मजदूरी के लिए ले जाने की सूचना मिली थी। इस बारे में चाइल्ड लाइन को बताया था। एसपी एस. आनंद को ई-मेल भेजकर सूचित किया है।
बच्चों और वयस्कों से पूछताछ की जा रही
जीआरपी प्रभारी फजल उर्रहमान खां ने बताया कि सूचना मिली थी कि कुछ बच्चों को अवध-आसाम एक्सप्रेस से बाल मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा है। अलग-अलग बोगियों से बच्चों को उतरा गया। नाबालिगों की संख्या 18 है, जिनके साथ 10 वयस्क लोग हैं। कुछ बच्चों के अभिभावक भी उनके साथ में हैं। बिहार के रहने वाले ये नाबालिग पूर्णिया जिले के अलग-अलग स्थानों से हैं। कोई बठिंडा जाने की बात कह रहा है, कोई कहीं जाने की बात बता रहा है। पूछताछ के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
काउंसिलिंग कर माता-पिता का लगाया जा रहा पता
चाइल्ड लाइन-1098 के शाहजहांपुर को-आर्डिनेटर विनय शर्मा ने बताया कि बाल मजदूरी के लिए जिन नाबालिगों को ले जाने की सूचना मिली थी, उनको ट्रेन से उतरवा लिया गया है। उनको जीआरपी की जीडी में दर्ज कर लिया है, मेडिकल और कोविड की जांच कराई गई है। अब उनको बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। जैसा समिति निर्णय लेगी, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। बताया कि सीडब्ल्यूसी के तहत काउंसिलिंग होने पर उनके माता-पिता के साक्ष्य मिल जाएंगे। अगर ऐसा नहीं होता है, तो उनको बाल मजदूर ही माना जाएगा। एक बच्चे को शहबाजनगर के पास से ट्रेन से उतारा है।
बच्चों की बात
शहनवाज ने बताया कि वह लैतुल का रहने वाला है। वह अपने चचेरे भाई के साथ जा रहा है। परिवार में मां शबनम आरा और बहन मौसमी है। बताया कि वह पढ़ने के लिए दिल्ली जा रहा है। लैतुल में अच्छी पढ़ाई नहीं होती।
मोहम्मद फरहान ने बताया कि उनके अब्बा का नाम जमील अख्तर है और पूर्णिया जिला का रहने वाला है। वह अपने खालू बदरुद्दीन के साथ बिजनौर में पढ़ने के लिए जा रहा है।
अफसर ने बताया कि मैं बंगाल का रहने वाला हूं और अपने चाचा अहमद रजा के साथ हरियाणा अपनी फुफ्फी के यहां घूमने जा रहा हूं। बोला कि उसके साथ जिन बच्चों को ट्रेन से उतारा गया वह उन्हें नहीं जानता है।
मोहम्मद शह जफर आलम ने बताया कि वह किशनगंज से बठिंडा जा रहा था। पूर्णिया जिले के जमीराडेंगा का रहने वाला है। अपने भाई मोहम्मद सज्जाद आलम के साथ जा रहा है, जोकि वहां पर मूंगफली बेचने का काम करते हैं।
वयस्कों की बात...
बदरुद्दीन ने बताया कि वह नेटौर में स्थित मदरसे में पढ़ाते हैं। बिजनौर जा रहे हैं, उनके पास टिकट है। उनके अलावा जिन लोगों को उतारा गया, उनको नहीं जानते हैं।
शाहीद ने बताया कि वह बिहार के पूर्णियां जिले का गांव जमीराडींगा का रहने वाला है। अपने बेटे मोहम्मद रिजवान और साले के बेटे मोहम्मद सलमान को लेकर जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें