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यूक्रेन संकटः युद्ध का असर... सोना-चांदी और खाद्य तेज के दामों में उछाल

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मोहम्मद जुनैद । - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। यूक्रेन पर रूस के हमले का असर जनपद में खाद्य तेल के कारोबार पर पहले से दिख रहा था, सराफा बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा। बीते दो दिन के दौरान सोने का भाव प्रति दस ग्राम 2500 रुपये और चांदी प्रति किलो तीन हजार रुपये तक उछाल ले चुकी है। हालांकि, ज्वैलर्स का कहना है कि यह कीमतें जेवरातों की मांग में वृद्धि होने से नहीं, बल्कि युद्ध के हालात पैदा होने से बढ़ी हैं।
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यूक्रेन संकट से अभी औद्योगिक क्षेत्र प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन उद्यमियों और कारोबारियों का कहना है कि अगर डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं तो इसका असर चौतरफा महंगाई के तौर पर देखने को मिलेगा। जिले में आभूषणों के छोटे-बड़े लगभग तीन हजार प्रतिष्ठान हैं। सामान्य दिनों की तरह यहां रोजाना औसतन 1.5 से दो करोड़ रुपये तक का जेवरातों का कारोबार हो रहा है। जिले के सराफा कारोबारी प्रतिदिन दिल्ली से सोने-चांदी के भाव लेकर यहां रेट खोलते हैं। गत एक सप्ताह से आमतौर पर सोना मेें प्रति दस ग्राम मुश्किल से 150-200 रुपये तक उतार-चढ़ाव आता रहा, लेकिन यूक्रेन पर हमले के बाद सोना की कीमतें अचानक दो से ढाई हजार रुपये प्रति ग्राम तक बढ़ गईं।
महंगा हो गया सोयाबीन और सूरजमुखी तेल
खाद्य तेल के थोक कारोबारी एवं खाद्य तेल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुशील गोयल के अनुसार फिलहाल किसी भी खाद्य तेल का यूक्रेन से आयात नहीं हो रहा, बल्कि सोयाबीन, राइस ब्रॉन आदि कई खाद्य तेलों की देश में ज्यादातर आपूर्ति इंडोनेशिया, मलेशिया, आस्ट्रेलिया आदि देशों से हो रही है। इसके बावजूद अन्य देशों से बीते दो-तीन दिन में खाद्य तेल के आयात में गिरावट आई तो इसका जिले के खाद्य तेल कारोबार पर भी असर पड़ा है। सरसों की नई फसल बाजार में आने वाली है।
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इसलिए सरसों तेल के भाव स्थिर हैं, लेकिन फारच्यून ब्रांड सोयाबीन तेल का 15 लीटर वाला जो टिन दो दिन पहले 2200 रुपये में बिका। अब उसके थोक दाम बढ़कर 2280 से 2300 रुपये तक हो गए हैं। खाद्य तेल के कारोबारी अमित गुप्ता के अनुसार सन फ्लॉवर तेल का 15 लीटर वाला टिन भी गत एक सप्ताह में 125 रुपये महंगा होकर अब 2325 रुपये मेें बिक रहा है। उनका कहना है कि सूरजमुखी का यूक्रेन में ज्यादा उत्पादन होने से कच्चा माल भी वहीं से आता है। इसलिए यह तेल अभी और महंगा हो सकता है।
बचाव की मुद्रा में आए निवेशक
यूक्रेन संकट के कारण शेयर बाजार में उतार चढ़ाव के साथ उन निवेशकों में भी उथल पुथल है, जो कई कंपनियों के शेयर में बड़ी धनराशि लगा चुके हैं। हालांकि, शेयर ब्रोकर्स का कहना है कि नए निवेशकों के लिए शेयर में निवेश करने का यह अच्छा मौका है, लेकिन उन्हें निवेश की लक्षित धनराशि के शेयर एक साथ लेने के बजाय उन्हें युद्ध की परिस्थितियां देखते हुए कई चरणों में थोड़ी-थोड़ी धनराशि निवेश करने की समझदारी दिखानी होगी। अगर आगे युद्ध से स्थितियां विषम होती हैं तो शेयर बाजार में फिर से गिरावट आएगी और तब नया निवेश निवेश करना ज्यादा लाभप्रद होगा।
उद्यमियों और कारोबारियों की बात
थ्री-डी प्रिंटिंग समेत चिकित्सा उपकरणों में काम आने वाला टाइटेनियम पदार्थ का आयात यूक्रेन से ही होता है। जनपद की किसी औद्योगिक इकाई मेें टाइटेनियम के इस्तेमाल की जानकारी नहीं है, लेकिन हालात जल्द नहीं सुधरे तो डीजल-पेट्रोल की दरें बढ़ने के साथ निर्यात में दिक्कतें बढ़ेंगी और ऐसी स्थिति में उद्योग जगत भी प्रभावित होगा। -शुभम खन्ना, जिलाध्यक्ष, आईआईए
मौजूदा हालात में यूरोपीय देशों का कारोबार ज्यादा प्रभावित हो रहा है। अपने देश की निर्भरता रूस और यूक्रेन पर नहीं है। चांदी की कीमतें इसलिए बढ़ रही हैं, क्योंकि उसका मोबाइल, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल सेक्टर की चिप बनाने आदि औद्योगिक उपयोग बढ़ रहा है, जबकि उत्पादन में कमी आई है। हालात ज्यादा बिगड़े तो लोग सोना-चांदी में निवेश करेंगे। -विनोद वर्मा, सराफा व्यवसायी
यूक्रेन-रूस में युद्ध का असर जनपद के बाजार में दिखने लगा है। खाद्य तेल की थोक कीमतें बढ़ने से आम आदमी को अब पांच से दस रुपये किलो महंगा तेल मिल रहा है। चुनाव बाद डीजल-पेट्रोल की कीमतें चढ़ने के कयास पहले से लगाए जा रहे हैं। युद्ध ने महंगाई की आग में घी का काम किया है। युद्ध लंबा खिंचा तो अन्य व्यवसाय भी प्रभावित होंगे। -वेद प्रकाश गुप्ता, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल, कंछल गुट
यूक्रेन से अपने देश का ज्यादा जुड़ाव नहीं है। रूस के पास हथियारों के अलावा ऐसी कोई चीज नहीं जो भारत के पास नहीं हो। दो देशों के आपसी विवाद का कुछ अन्य तेल उत्पादक देश अभी से लाभ उठाने में जुट गए हैं। इसीलिए नाटो देशों द्वारा रूस पर हमले से इनकार के बाद सराफा और शेयर बाजार सुधरने लगा, लेकिन कच्चे तेल के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। -कुलदीप सिंह दुआ, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल, मिश्रा गुट
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीधा हमला करने के बजाय रूसी अभिजात वर्ग, राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों और बैंकों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा के बाद निवेशकों में शेयर बाजार के प्रति आशावाद बढ़ाया है। इसीलिए शुक्रवार को भारत समेत संपूर्ण एशिया में स्टॉक एक्सचेंज चढ़ गया, जबकि यूएस इक्विटी फ्यूचर्स में उतार-चढ़ाव बना है। -काजी मोहम्मद जुनैद, शेयर ब्रोकर

शुभम- फोटो : SHAHJAHANPUR

विनोद गुप्ता ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

वेदप्रकाश गुप्ता ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

कुलदीप सिंह दुआ ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

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