प्रदेश में खुले नए राजकीय हाईस्कूलों में फिर बिना शिक्षकों के ही नया सत्र शुरू हो गया है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश में अब तक एक हजार से अधिक नए राजकीय हाईस्कूल खुल चुके हैं।
शिक्षक महज डेढ़ हजार भर्ती हुए, जबकि इनमें आठ हजार से अधिक शिक्षकों की जरूरत थी। दूसरे राजकीय कॉलेजों से दो-दो शिक्षक संबद्ध करके इन स्कूलों में पढ़ाई की औपचारिकता हो रही है।
नए पद भी सृजित हुए और इस साल भर्ती का वादा किया गया, लेकिन बाद में भर्तियां टल गईं। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की शुरुआत में ही सबसे पहले राजकीय स्कूल खोलने पर खास जोर दिया गया।
जब इनके लिए जमीन नहीं मिली तो प्रदेश सरकार ने रास्ता निकाला कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों के पास जहां जमीन है, उन्हें ही उच्चीकृत करके नए स्कूल का दर्जा दे दिया जाए।
इस प्रस्ताव को केंद्र ने मान लिया। इसके बाद 2009-10 से नए राजकीय हाईस्कूल खुलने का सिलसिला शुरू हो गया। तब से लगातार नए राजकीय हाईस्कूल खुल रहे हैं।
अब तक कुल 1021 हाईस्कूल खुल चुके हैं। इनमें 8164 शिक्षकों की जरूरत थी लेकिन भर्ती हुए महज 1500। हालत यह है कि पुराने राजकीय कॉलेजों से नए में दो शिक्षक संबद्ध किए जाते हैं।
इन्हीं पर सभी दस कक्षाओं का भार होता है। ऐसे में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। वहीं, इस व्यवस्था से पुराने राजकीय कॉलेजों में भी शिक्षकों का टोटा बढ़ गया।
दूसरी तरफ, शिक्षक संगठनों ने दबाव बनाया तो अफसरों ने नई भर्ती के दावे किए। जो अब भी दूर की कौड़ी है। इस बारे में निदेशक राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान चित्रा वी. से बात की गई, लेकिन उन्होंने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।