सर्दी में लापरवाही बना सकती है बहरा
शुरुआती ठंड में अक्सर सर्दी, जुकाम, खांसी की चपेट में आ जाते हैं लोग
ज्यादा खांसी आने से पीड़ित के कान में इंफेक्शन का खतरा होता है
संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। नवंबर माह सेे ही सुबह-शाम सर्द व दिन मेें गर्म का खेल जारी है। नवंबर का आखिरी सप्ताह शुरू होने से पहले ठंड ने अपने पांव पसार दिए हैं। ठंड शुरू होते ही अक्सर लोगों में खांसी और सर्दी के लक्षण नजर आने लगते हैं। इन बीमारियों को लोग हल्के में लेते हैं। ऐसे में जरा सी भी लापरवाही आपके कान पर भारी पड़ सकती है। लंबे समय तक खांसी या सर्दी रहने से कानों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। समय पर इलाज न होने से व्यक्ति बहरा भी हो सकता है।
अक्सर लोग सर्दी और खांसी का होना आम बात मानते हैं। मगर विशेषज्ञ डॉक्टरों का मानना है कि काफी समय तक खांसी और सर्दी का रहना स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। सेमरियावां सीएचसी अधीक्षक जगदीश पटेेल का कहना है कि ठंड की शुरुआत के साथ ही यह बीमारी शुरू हो जाती है। अक्सर लोग इन बीमारियों को साधारण समझ इस पर ध्यान नहीं देते हैं। यही भूल इनको बहरा बना सकती है। इससे ग्रसित होने पर मरीज की नाक जाम हो जाती है। बार-बार तेज खांसी से कान के परदे पर बुरा असर पड़ता है। लंबे समय तक यही स्थिति बनी रहने से कान में इंफेक्शन होने का डर भी बना रहता है। इंफेक्शन से कान में सूजन आ जाती है। इसका असर सीधे परदे पर पड़ता है। इससे आदमी को बहरा होने का भी खतरा बना रहता है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. जगदीश पटेल का कहना है कि ऐसे मौसम में आमतौर पर दमा और सांस के मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे मरीज अपनी दिनचर्या में बदलाव लाएं। इस मौसम में बच्चों को खास एहतियात रखना चाहिए। बदले मौसम से मासूम बच्चे निमोनिया की जद में आ जाते हैं। बुजुर्गों को ठंड से बचना चाहिए।
बच्चों का विशेष ख्याल जरूरी
सेमरियावां। ठंड के मौसम का सबसे तेज असर बच्चों पर पड़ता है। इसलिए बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों को ऊनी गर्म कपड़ों के साथ साथ कान को ढकने के लिए टोपी भी लगानी चाहिए। क्योंकि बच्चों के कान का परदा और अधिक नाजुक होता है। इससे खांसी और सर्दी में उन पर बुरा असर पड़ता है।
सावधानी ही बचाव का बेहतर जरिया
ठंडक से बचें।
मार्निंग वॉक में गर्म कपड़े पहनें।
अचानक सर्द गर्म से बचें।
सुबह ठंडे पानी से न नहाएं।