जिले में 6969 लोगों ने रकम ली, पर नहीं बनवाया घर
पीएम आवास योजना ग्रामीण : इस वित्तीय वर्ष में भी 69 आवास ही हो पाए हैं पूर्ण
आवास पूर्ण नहीं करवाने वाले लाभार्थियों से रिकवरी करने की चल रही है तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का बुरा हाल है। पिछले चार वित्तीय वर्षों के 6969 लाभार्थियों ने आवास की रकम ले ली लेकिन आवास पूरा नहीं कराया। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष में भी सिर्फ 69 आवास पूर्ण हुए हैं। डीआरडीए के परियोजना निदेशक दुर्गा दत्त शुक्ल ने बीडीओ को चेतावनी दी है कि अधूरे आवासों को अविलंब पूर्ण कराएं। अन्यथा संबंधित लाभार्थियों से आवास की रकम की वसूली की जाएगी।
गांवों में रहने वाले गरीब बेघर परिवारों को आवास मुहैया कराने के लिए शासन की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण संचालित की जा रही है। इसके तहत प्रत्येक लाभार्थी को 1.20 लाख रुपये दिए जाते हैं। लाभार्थियों को 90 दिन की मनरेगा से मजदूरी भी दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 6576 लाभार्थियों को आवास दिया गया था। इसमें से 6547 ने आवास पूर्ण कराया। 29 लाभार्थियों का आवास नहीं बन पाया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 6770 लाभार्थियों को आवास दिया गया। इसमें से 6744 लाभार्थियों ने आवास पूर्ण कराया। जबकि 26 लाभार्थियों का आवास पूर्ण नहीं हुआ।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में 3825 लाभार्थियों को पीएम आवास योजना का लाभ दिया गया। इसमें में से 3816 लाभार्थियों ने घर तो बना लिया, लेकिन नौ लाभार्थियों का आवास नहीं बन पाया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में 2530 लाभार्थियों को आवास दिया गया। इसमें से 2232 लाभार्थियों ने घर बनाया। जबकि 298 लाभार्थियों ने निर्माण पूर्ण नहीं कराया। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 21557 लाभार्थियों को आवास योजना का लाभ दिया गया। इसमें से 14,950 लाभार्थियों ने आवास पूर्ण कराया। जबकि 6607 लाभार्थियों के आवास अपूर्ण हैं। इस तरह पिछले चार वित्तीय वर्षों का 6969 लाभार्थियों का आवास अधूरा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 12,198 लाभार्थियों को आवास दिए जाने का लक्ष्य है। इसमें से 11,966 लाभार्थियों का आवास स्वीकृत हो पाया है। 10,266 लाभार्थियों को प्रथम किस्त, 3487 लाभार्थियों को द्वितीय और 107 लाभार्थियों को तृतीय किस्त दी गई है। जबकि 64 आवास ही पूर्ण हो पाए हैं।
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तीन माह में पूर्ण करना होता है आवास
आवास निर्माण पूर्ण कराए जाने की समय सीमा वैसे तो तीन महीने की होती है, लेकिन वित्तीय वर्ष के भीतर तो आवास हर हाल में पूर्ण हो जाना चाहिए। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जुलाई तक सिर्फ नौ प्रतिशत आवास ही स्वीकृत हुए थे। जबकि तीन महीने के भीतर 98 प्रतिशत आवास स्वीकृत कराया गया। इस वित्तीय वर्ष में सबसे खराब स्थिति बघौली, बेलहर,नाथनगर और पौली ब्लॉक की है। नाथनगर और पौली में एक भी आवास पूर्ण नहीं हुए हैं। जबकि बघौली में छह और बेलहर में 11 आवास पूर्ण हुए हैं।
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पिछले चार वित्तीय वर्षों में अधूरे आवास की समीक्षा की गई है। सभी बीडीओ को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि अधूरे आवासों का निर्माण कार्य अविलंब पूर्ण कराएं। अन्यथा लाभार्थियों से वसूली की जाएगी। लापरवाही बरतने वाले बीडीओ और सचिव को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई कराई जाएगी।
- दुर्गा दत्त शुक्ला, डीआरडीए परियोजना निदेशक
कोट
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की समीक्षा की गई। इसमें आवास निर्माण की स्थिति असंतोषजक पाई गई है। पिछले चार वित्तीय वर्षों में ही काफी संख्या में लाभार्थियों ने रकम लेकर आवास पूर्ण नहीं कराया है। इसके लिए सभी बीडीओ को कड़ी चेतावनी दी गई। लाभार्थियों से संपर्क करके उन्हें आवास निर्माण के लिए प्रेरित करें अन्यथा की स्थिति में रिकवरी कराई जाएगी।
- सुरेंद्रनाथ श्रीवास्तव, सीडीओ