संभल। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा व चतुर्थ मां कूष्मांडा की आराधना की गई। दरअसल, इस बार नवरात्रि आठ दिन के हैं। इस वजह से तीसरे दिन देवी मां के दो स्वरूपों की एक साथ पूजा की गई। वैसे तो तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है, लेकिन दो तिथियां एक साथ होने की वजह से तीसरे दिन मां कूष्मांडा की भी पूजा की। मंदिरों में पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता की प्रतिमा के चरणों में जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। मंदिरों में घंटे घड़ियालों की आवाजें गूंजती रहीं।
मंदिरों में महाआरती के समय मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भर गए। कई मंदिरों में तो व्यवस्था को संभालने में मंदिर कमेटी सदस्यों और पुजारी को काफी दिक्कत भी आई। नगर के मोहल्ला हल्लू सराय स्थित सिद्धपीठ प्राचीन श्री चामुंडा देवी मंदिर पर नवरात्र के तीसरे दिन भारी संख्या में श्रद्धालु मां चंद्रघंटा व चतुर्थ मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे। सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर में मां के दर्शन के लिए कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार करने लगे। मंदिर के महंत मुरली सिंह ने बताया कि नवरात्रि के तीसरे दिन मां भगवती की तृतीय शक्ति मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार तृतीया और चतुर्थी तिथि एक ही दिन पड़ी। जिसके कारण मां चंद्रघंटा और मां कूष्मांडा की पूजा का शुभ संयोग एक ही दिन बना था। इसलिए मां चंद्रघंटा के साथ कूष्मांडा माता का पूजन भी किया गया। इस बार नवरात्रि का समापन भी आठ दिन में हो जाएगा।